चंडीगढ़, [सुधीर तंवर]। हरियाणा के सरकारी महकमों, बोर्ड-निगमों, विश्वविद्यालयों, स्थानीय निकाय और सरकारी कंपनियों में लगे कच्चे कर्मचारियों की भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी बीमा (ईएसआइ) और लेबर फंड को आउटसोर्सिंग कंपनियां व ठेकेदार अफसरों की मिलीभगत से हजम कर रहे हैं। कर्मचारियों की हकमारी पर संज्ञान लेते हुए अब सरकार ने अफसरों से जवाब तलब किया है। निर्धारित समय में पैसा कर्मचारियों के खाते में नहीं डालने वाली आउटसोर्सिंग कंपनियों और ठेकेदारों को भुगतान करने पर संबंधित डीडीओ (आहरण एवं वितरण अधिकारी) की तनख्वाह से भरपाई की जाएगी।

फंड का पैसा खाते में नहीं डालने के बावजूद विभागाध्यक्ष करा रहे आउटसोर्सिंग कंपनियों को भुगतान

प्रदेश में आउटसोर्सिंग पॉलिसी पार्ट वन व पार्ट-टू के तहत एक लाख से अधिक कच्चे कर्मचारी काम कर रहे हैं। अधिकतर कर्मचारियों का न तो पीएफ जमा कराया जाता है और न ईएसआइ व लेबर फंड। हरियाणा विधानसभा में मामला उठने के बाद पिछले साल 7 दिसंबर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नियम लागू किया था कि सभी विभागाध्यक्ष ठेकेदारों और कंपनियों को भुगतान से पहले सुनिश्चित करेंगे कि कर्मचारियों के फंड का सारा पैसा उनके खाते में डाल दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने किया जवाब तलब, डिफाल्टर कंपनियों व ठेकेदारों को भुगतान पर कटेगी डीडीओ की तनख्वाह

मुख्यालय पर नियमित रूप से इसकी रिपोर्ट भेजनी होगी और संबंधित महकमे व बोर्ड-निगम ठेकेदारों को प्रमाणपत्र जारी करेंगे कि उन्होंने प्रत्येक कर्मचारी का फंड उसके खाते में डाल दिया है। अफसरों से सांठ-गांठ के कारणअधिकतर ठेकेदार न तो पूरा फंड कर्मचारियों के खाते में डाल रहे और न ही किसी विभागाध्यक्ष ने आउटसोर्सिंग कंपनियों का भुगतान रोकने की जहमत उठाई।

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इस पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने श्रम विभाग के प्रधान सचिव से जवाब तलब कर लिया। सभी विभागाध्यक्षों, बोर्ड-निगमों के प्रबंध निदेशकों और मंडल आयुक्तों व उपायुक्तों से पूरा ब्योरा मांगा गया है कि कर्मचारियों का फंड नहीं देने वाली कितनी कंपनियों व ठेकेदारों का भुगतान रोका और किस तरीके से क्षतिपूर्ति की गई। इसके अलावा कच्चे कर्मचारियों को नियमित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए।

हर महीने दस तारीख तक ऑनलाइन अपडेट करना होगा सर्टिफिकेट

नई व्यवस्था में अब सभी विभागाध्यक्षों को हर महीने की दस तारीख तक श्रम विभाग के पोर्टल पर सर्टिफिकेट देना होगा कि संबंधित कंपनियों ने ईएसआइ, ईपीएफ व लेबर फंड का पैसा जमा करा दिया है। यह प्रमाणपत्र डीडीओ को भी दिया जाएगा जिसके बाद ठेकेदारों को कर्मचारियों के वेतन के रूप में दी जाने वाली राशि जारी होगी। अगर बगैर सर्टिफिकेट के भुगतान हुआ तो डीडीओ की तनख्वाह से कच्चे कर्मचारियों की फंड की राशि काटी जाएगी।

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मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ हो रही बैठक में कर्मचारी संगठन कच्चे कर्मचारियों के शोषण का मुद्दा उठाएंगे। सर्व कर्मचारी संघ के महासचिव सुभाष लांबा ने कहा कि ठेकेदार न तो कच्चे कर्मचारियों के फंड का पूरा पैसा उनके खाते में डाल रहे और न सरकार दोषियों पर कोई एक्शन ले रही। अफसरों की मिलीभगत से पूरा खेल चल रहा है। सरकार के साथ बैठकों में कई बार मुद्दा उठने के बावजूद कच्चे कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिल पा रहा।

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