चंडीगढ़, जेएनएन। हरियाणा में नवगठित पांच नगरपालिकाओं की वैधानिक स्थिति पर संकट मंडराने लगा है। कुंडली, साढ़ौरा, इस्माईलाबाद, बास और सिसाय में नगर पालिकाओं को अधिसूचित हुए एक से तीन साल का समय बीतने के बावजूद पहले आम चुनाव नहीं कराए गए हैं। न ही हरियाणा म्युनिसिपल (नगर पालिका ) अधिनियम, 1973 में संशोधन कर एक वर्ष के भीतर आम चुनाव कराने की समय सीमा को आगे बढ़ाया गया है।

कुंडली, साढ़ौरा, इस्माईलाबाद, बास और सिसाय नगर पालिकाओं पर खतरा

अक्टूबर 2018 में सोनीपत के कुंडली, नवंबर में यमुनानगर के साढौरा और कुरुक्षेत्र में इस्माईलाबाद तथा दिसंबर 2018 में हिसार जिले की बास को नगर पालिका का दर्जा दिया गया था। हिसार जिले में ही सिसाय को फरवरी 2019 में नगर पालिका के रूप में अधिसूचित किया गया। नियमानुसार पालिका बनने के एक साल के भीतर आम चुनाव जरूरी हैं। इसके बावजूद नई बनी पांच नगरपालिकाओं में अभी तक चुनाव नहीं हो पाए हैं।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के अधिवक्ता हेमंत कुमार ने बताया कि बीती छह जुलाई कैबिनेट ने हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994  की धारा 4(4) में फिर से संशोधन कर नए नगर निगम के पहले आम चुनाव अधिसूचना जारी होने के साढ़े पांच वर्षों में कराने की अनुमति दी है। इससे सोनीपत नगर निगम पर मंडरा रहा वैधानिक संकट खत्म हो गया। इसी तर्ज पर पालिका अधिनियम में बदलाव कर चुनाव की सीमा एक साल से बढ़ाई जाए ताकि नवगठित पालिकाओं का कानूनी अस्तित्व बरकरार रहे।

पहले निगम बनने के छह महीने में कराने होते थे चुनाव

एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि  हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994, जो मूलत: तत्कालीन फरीदाबाद नगर निगम के लिए बनाया गया था, में निगम के पहले चुनाव कराने की अवधि मात्र छह माह रखी गई थी। जून 2008 में तत्कालीन हुड्डा सरकार ने गुडग़ांव (अब गुरुग्राम) नगर निगम अधिसूचित किया। चुनाव छह माह में नहीं हो सके तो कानून में चार बार संशोधन कर  इस अवधि को पहले एक साल, फिर दो साल, फिर ढाई साल और फिर तीन वर्ष कर दिया गया।

अधिसूचना के एक से तीन साल बाद भी नहीं हुए पहले आम चुनाव, कानून में बदलाव जरूरी

इस तरह मई 2011 में गुरुग्राम नगर निगम के  चुनाव संपन्न हो सके। इसके बाद जब मार्च 2010 में नगर निगम के रूप में अधिसूचित अंबाला, हिसार, करनाल, पानीपत, पंचकूला, रोहतक और यमुनानगर नगर निगमों के चुनाव तीन वर्ष में नहीं हो सके तो हुड्डा से सरकार ने समय सीमा को तीन वर्ष तीन महीने कर दिया।

इस तरह जून 2013 में उक्त सात नगर निगमों के पहले आम चुनाव कराए गए। सोनीपत निगम के पहले आम चुनाव तीन वर्ष तीन माह में भी नहीं हो पाए तो मनोहर सरकार ने सितंबर 2018 में इस   समय सीमा को बढ़ाकर चार वर्ष, अगस्त 2019 में पांच वर्ष किया गया है।

 

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