चंडीगढ़, [अनुराग अग्रवाल]।  हरियाणा सरकार ने अपना चुनावी वादा पूरा करते हुए सितंबर-अक्टूबर में छात्र संघ के चुनाव कराने का एलान तो कर दिया है, लेकिन चुनाव सीधे नहीं कराए जाएंगे। पहले कालेजों में कक्षाओं के प्रतिनिधि और विश्वविद्यालयों में विभागों के प्रतिनिधि चुने जाएंगे। ये प्रतिनिधि ही कालेज और यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के अध्यक्ष और बाकी पदाधिकारियों का चुनाव करेंगे। इससे छात्र संगठन सहमत नहीं हैं आैर वे प्रत्‍यक्ष चुनाव कराए जाने की मांग कर रहे हैं। इस तरह छात्र संघ चुनाव से पहले ही संग्राम छिड़ता दिख रहा है।

राज्य सरकार ने खारिज की कुलपतियों की कमेटी की आनलाइन चुनाव की सिफारिश

छात्र संघ के चुनाव आनलाइन कराए जाने का प्रस्ताव भी सरकार ने निरस्त कर दिया है। शिक्षा मंत्री द्वारा गठित कुलपतियों की कमेटी ने आनलाइन चुनाव कराने का प्रस्ताव दिया था। प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल के छात्र संगठन इनसो और कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआइ इस तरह अप्रत्यक्ष (इनडायरेक्ट) चुनाव कराए जाने के पक्ष में नहीं हैैं।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी सरकार के फार्मूले पर एतराज जताया है। दो दिन पहले ही परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष डा. राजेंद्र धीमान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिला था और छात्र संघ के चुनाव सीधे मतदान के जरिये कराने की मांग उठाई थी। पहले भी छात्र संघ चुनाव सीधे कराए जाते थे।

एबीवीपी के प्रांतीय संगठन मंत्री श्याम राजावत ने कहा कि लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के आधार पर मतदान के जरिये चुनाव कराने की मांग मुख्यमंत्री से हमने की थी। एबीवीपी अपनी इस मांग पर आज भी कायम है। इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला शुरू से ही अप्रत्यक्ष चुनाव कराने के पक्ष में नहीं हैैं। उनका कहना है कि सरकार बार-बार गुमराह कर रही है। कालेजों और विश्वविद्यालयों में मतदान के जरिये चुनाव होना चाहिए। इसे लेकर इनसो ने राज्य में बड़ा आंदोलन खड़ा किया। सरकार को झुकना पड़ा और प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने रामबिलास शर्मा ने इसका वादा किया था।

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एनएसयूआइ की हरियाणा इकाई के अध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा भी अप्रत्यक्ष चुनाव कराने के विरोध में हैैं। उनका कहना है कि कालेजों और विश्वविद्यालयों ने राजनीति की नई पौध निकलती है। इसलिए छात्रों का हक नहीं छीना जाना चाहिए।

सरकार नहीं चाहती, हिंसा का दौर लौटे : बेदी

प्रदेश में लगभग 22 साल बाद सितंबर और अक्टूबर में छात्र संघ के चुनाव होने हैैं। बंसीलाल सरकार के समय छात्र संघ चुनावों पर रोक लगा दी गई थी। इसका कारण चुनावों के दौरान होने वाली हिंसा थी। हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने मंत्री समूह की बैठक में हुई चर्चा के हवाले से बताया कि सरकार ने अपना वादा पूरा कर दिया है और सितंबर व अक्टूबर में अप्रत्यक्ष प्रणाली के जरिये चुनाव होंगे, ताकि शिक्षण संस्थानों की गरिमा बनी रहे और किसी तरह की हिंसा का सामना प्रदेश को न करना पड़े। मुख्यमंत्री मनोहर लाल पहले ही जिला उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में चुनाव की तैयारी के निर्देश दे चुके हैैं। 

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Posted By: Sunil Kumar Jha