यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 24, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आंदोलन पर जाट नेताओं में टकराव, मान व सांगवान का मलिक पर हमला
हरियाणा में जाट आंदोलन को लेकर जाट नेताओं में टकराव के हालात बन गए हैं। ओपी मान और हवा सिंह ...और पढ़ें

जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में प्रस्तावित जाट आंदोलन को लेकर समाज के नेता आपस में ही भिडऩे को तैयार हैं। यशपाल मलिक गुट जहां आंदोलन करने की रणनीति बना रहा है, तो ओपी मान और हवा सिंह सांगवान गुटों ने मलिक के ही खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसका फायदा राज्य सरकार को मिल सकता है।
मलिक, मान और सांगवान गुटों में टकराव के हालात बने
दूसरी ओर, विपक्ष ने प्रस्तावित जाट आंदोलन को लेकर राज्य सरकार पर ही हमले करने शुरू कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि राज्य सरकार खुद आंदोलन का माहौल पैदा कर रही है। कांग्रेस के विधायक एवं विधानसभा के पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा ने जाट आंदोलन को लेकर सरकार पर हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार खुद ही जाट आंदोलनकारियों को उकसा कर उनसे जानबूझकर आंदोलन करवा रही है। वह कहती है कि बातचीत के लिए सभी विकल्प खुले हैैं लेकिन सरकार ने एक बार फिर जाट नेताओं को बातचीत के लिए नहीं बुलाया है।
जाटों को आरक्षण देने की सरकार की नीयत साफ : मान
अखिल भारतीय जाट महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ओपी मान ने अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक के खिलाफ हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आरक्षण आंदोलन के नाम पर यशपाल मलिक स्वार्थ की राजनीति कर रहे हैैं। सरकार की जाटों को आरक्षण देने की नीयत साफ है। ऐसे में आंदाेलन की अभी कोई जरूरत नहीं है।
यशपाल मलिक जनता को बरगला रहे : सांगवान
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक हवा सिंह सांगवान ने भी यशपाल मलिक पर प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि अभी आंदोलन करना जाट समाज के हित में नहीं है। राज्य सरकार जाट समाज के हित में खड़ी नजर आ रही है। यशपाल मलिक बाहरी आदमी हैैं और प्रदेश की जनता को बरगला रहे हैं।
अगर झगड़ा हुआ तो सरकार जिम्मेदार : मलिक
जाट नेता यशपाल मलिक ने कहा, मैैं जाट समुदाय के साथ-साथ पूरी छत्तीस बिरादरी की बात कर रहा हूं। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष के नेता मेरा दायरा किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। अगर ऐसा होता तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात और मुख्यमंत्री मनोहर लाल सिर्फ करनाल तक रहते। सरकार से समझौता वार्ताओं पर अमल का दबाव बना रहे हैैं। सभी को इसमें सहयोग करना चाहिए। आंदोलन शांतिपूर्ण होगा। अगर कहीं कोई झगड़ा होता है तो वह सरकार के लोग ही कराएंगे।
