चंडीगढ़ [अनुराग अग्रवाल]। हरियाणा की भाजपा-जजपा गठबंधन (BJP-JJP alliance) की सरकार अफसरशाही में लगातार नए प्रयोग कर रही है। कुछ अधिकारी इन प्रयोगों को सरकार के सुधारवादी प्रयासों के रूप में पेश कर रहे हैं तो कुछ इन प्रयोग से खासे नाराज हैं। ताजा मामला परिवहन विभाग में HPS, वन विभाग और रोजगार विभाग के अधिकारियों को रीजनल ट्रांसपोर्ट अथारिटी (RTA) का सचिव लगाने का है। यह पद HCS काडर के अधिकारियों का है, लेकिन इन पर HPS और दूसरे विभागों के अफसरों की नियुक्तियों से अफसरशाही में विद्रोह के आसार बनते जा रहे हैं।

हरियाणा के HCS अधिकारियों की एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीप ढांडा के अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिए जाने के बाद सिविल और पुलिस अधिकारियों में टकराव की आशंका बलवती हुई है। जगदीप ढांडा ने एसोसिएशन के वरिष्ठ उप प्रधान अमरजीत जैन को अपने इस्तीफे की सूचना भेजकर अध्यक्ष के पद पर काम करने में असमर्थता जाहिर कर दी है।

मुख्यमंत्री कार्यालय में सीएम के ओएसडी HCS अधिकारी सतीश चौधरी इस एसोसिएशन के सचिव हैं। जगदीप ढांडा ने अपना पद छोड़ने के पीछे हालांकि कोई बड़ा कारण नहीं बताया है, लेकिन HCS अफसरों की लाबी में इस बात को लेकर खासा आक्रोश है कि HCS काडर के अधिकारियों के पदों पर पुलिस विभाग के (HPS) अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है।

हरियाणा सरकार ने शनिवार रात को सात HCS, पांच HPS, वन विभाग के दो और रोजगार विभाग के दो अफसरों को RTA सचिव के पद पर नियुक्ति दी है। HPS मनीष सहगल को अंबाला रोडवेज का महाप्रबंधक नियुक्त किया गया है। यह नियुक्तियां तब की गई है, जब कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा की मौजूदगी में RTA सचिव का पद खत्म करते हुए जिला परिवहन अधिकारी (DTO) के पद बहाल करने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा की अधिसूचना समय से जारी नहीं हुई, जिस कारण सरकार को DTO के बजाय RTA सचिव के पदों पर ही नई नियुक्तियां करनी पड़ी हैं, लेकिन यह नियुक्तियां सरकार के गले की फांस बन सकती हैं।

HCS अधिकारियों की एसोसिएशन में इस बात को लेकर खासा आक्रोश है कि HCS काडर के पदों पर पुलिस अफसरों (HPS) की पिछले काफी समय से निगाह थी। HCS कैडर के पदों पर HPS की नियुक्ति नहीं की जा सकती। यदि कोई HCS अधिकारी सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे तो सभी नियुक्तियों पर बिना किसी देरी के स्टे मिल सकता है। अधिकारियों के आक्रोश और नाराजगी का सिर्फ अकेला यही कारण नहीं है। प्रदेश सरकार पहले भी अफसरशाही में कई बड़े प्रयोग कर चुकी है।

पहले भी हो चुके कुछ प्रयोग पर चुप रहे अफसर अब सब्र टूटा

हरियाणा सरकार के सीनियर मंत्री अनिल विज से पंगा होने के बाद सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में आइपीएस अधिकारी शत्रुजीत कपूर को बिजली निगमों का चेयरमैन नियुक्त कर दिया था। यह पद IAS अधिकारी का है। इसी तरह आइपीएस अधिकारी अमिताभ ढिल्लो को खनन एवं भूगर्भ विभाग के महानिदेशक का पद सौंपा गया। यह पद भी आइएस अधिकारी का है।

मुख्यमंत्री कार्यालय में पहले आइपीएस ओपी सिंह को ओएसडी लगाया गया। बाद में आलोक मित्तल को ओएसडी सीआइडी नियुक्त किया गया। अब रिटायर्ड चीफ सेक्रेटरी डीएस ढेसी को मुख्यमंत्री का मुख्य प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है। बेशक ढेसी सीनियर अधिकारी हैं, लेकिन अहम पदों पर बैठे वरिष्ठ अधिकारियों को सीएम के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी के नाते ढेसी को रिपोर्टिंग करनी पड़ेगी, जो उन्हें नागवार गुजर रही है।

परिवहन विभाग में घुसने को लंबे समय से घात लगाए बैठे थे पुलिस अधिकारी

परिवहन विभाग में घुसने के लिए पुलिस अधिकारी लंबे समय से घात लगाए बैठे थे। इसकी एक वजह यह है कि RTA सचिव को कागजों पर ज्यादा साइन नहीं करने पड़ते और हर काम के लिए मुंह-जुबानी जमा खर्च में काम चल जाता है। विभिन्न सरकारों में यह पद अभी तक पहले एडीसी, फिर एसडीएम, फिर सीनियर HCS अधिकारी और अब HPS, वन विभाग तथा रोजगार विभाग के अधिकारियों को दे दिया गया है। HCS अफसरों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि उन सभी को भ्रष्ट मानकर यह कार्रवाई की गई है, जबकि HPS लाबी में इस बात की खुशी है कि उनके परिवहन विभाग में घुसने के लंबे समय से चले आ रहे प्रयास आखिरकार कामयाब हो गए हैं। 

मनोहर लाल से पहले बंसीलाल और हुड्डा ने भी करनी चाही थी सफाई

हरियाणा के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए हर सरकार ने कोशिश की, लेकिन उसे सफलता हासिल नहीं हो पाई। सबसे पहले चौ. बंसीलाल ने डिविजन लेवल पर RTA सचिव लगाए, लेकिन काम नहीं बना। उनके बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने डीटीओ लगाए। बात नहीं बनी तो एसडीएम को चार्ज दिया गया। उसके बाद भी सिस्टम ठीक नहीं हुआ तो मनोहर लाल ने सीनियर HCS अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी। परिवहन मंत्री की ओर से सुझाव आया कि इंडीपेंडेंट चार्ज वाले RTA लगाए जाएं। कुछ सुशासन सहयोगियों ने भी सुझाव दिया कि इन पदों पर दूसरे विभागों के अधिकारियों की नियुक्तियों का प्रयोग किया जाना चाहिए। इससे HCS लाबी खुद को अपमानित महसूस करने लगी। दलील दी जा रही है कि यदि पुलिस से भी परिवहन विभाग का भ्रष्टाचार कंट्रोल नहीं हो पाया तो क्या मिलिट्री की सेवाएं ली जाएंगी।

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