जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य के करीब पांच हजार Computer teachers व सहायकों के आंदोलन को अवैधानिक करार दिया है। प्रदेश सरकार ने दावा किया है कि Computer teachers व सहायकों की हर जायज मांग मानी गई, लेकिन चुनावी मौसम में राजनीतिक दबाव के चलते अब यह लोग शिक्षा विभाग में समायोजित करने की मांग कर रहे हैं, जो तर्कसंगत नहीं है।

हरियाणा सरकार ने Computer teachers व सहायकों की नियमित भर्ती का संकेत देते हुए उन्हें अनुभव का लाभ देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल से चर्चा करने के बाद उनके पूर्व ओएसडी जवाहर यादव ने बताया कि केंद्रीय स्कीम के तहत इन Computer teachers व सहायकों की भर्ती तीन साल के लिए की गई थी। 2015 में उनके तीन साल पूरे हो गए थे। कुल बजट का 60 फीसद हिस्सा केंद्र सरकार और 40 फीसद हिस्सा राज्य सरकार को देना प्रस्तावित था।

जवाहर यादव के अनुसार शुरू में जब इन Computer teachers व सहायकों को 14 माह का रुका हुआ वेतन नहीं मिला था, तब भाजपा सरकार ने 71 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान कर उन्हें हुड्डा सरकार के कार्यकाल का वेतन जारी कराया। कंप्यूटर शिक्षक चाहते थे कि उनके साथ छलावा करने वाली तीन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जाए। राज्य सरकार ने यह मांग भी पूरी की। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 2015 के बाद अब तक करीब चार साल का अनुबंध भी बढ़ा दिया है। अब इन शिक्षकों को मार्च 2020 तक काम पर रखा जाएगा।

जवाहर यादव ने बताया कि विधानसभा चुनाव के चलते कंप्यूटर शिक्षक व सहायका दूसरे दलों के हाथों में खेल रहे हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें शिक्षा विभाग में समायोजित किया जाए, जो कि संभव नहीं है। हरियाणा सरकार सभी भर्तियां कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से करेगी। भविष्य में Computer teachers व सहायकों की जो भी नियमित भर्ती होगी, उसमें उन्हें अनुभव का लाभ दिया जाएगा। यह आठ नंबर का हो सकता है।

जवाहर यादव के अनुसार यदि भाजपा सरकार इन कर्मचारियों को सेवा विस्तार नहीं देती तो वह 2015 में ही अपने घर बैठ गए होते। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मानवता का परिचय देते हुए इन कर्मचारियों की हमेशा चिंता की और अब वे दबाव की राजनीति पर उतर आए हैं।

उन्होंने उदाहरण दिया कि मनोहर सरकार ने रोडवेज के 8200 चालकों व परिचालकों को पक्का किया है, जबकि हुड्डा सरकार में सड़कों पर घूम रहे 12 हजार जेबेटी में से करीब साढ़े नौ हजार को रोजगार दिया गया है। ऐसे में यह आंदोलन पूरी तरह से अवैधानिक, राजनीति से प्रेरित तथा जनभावनाओं के विपरीत है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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