जेएनएन, चंडीगढ़। इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला ने अपने परिवार के सदस्यों की बजाय पार्टी के अनुशासन को अधिक तरजीह दी है। इनेलो के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका था, जब पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला की मौजूदगी में किसी रैली में हूटिंग हुई थी। चौटाला इस अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं कर सके और उन्होंने परिवार के सदस्यों को अहमियत देने की बजाय अनुशासनहीन लोगों को सबक देने अधिक उचित समझा।

पार्टी नेताओं के अनुसार, युवा इनेलो और इनसो में बाहरी तत्वों की घुसपैठ से बिगड़े थे हालात

इनेलो की यूथ विंग और इनसो को भंग करने के बाद हरियाणा की राजनीति में भले ही नई बहस छिड़ गई, लेकिन पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता ओमप्रकाश चौटाला की इस कार्रवाई को अनुशासन से जोड़कर देख रहे हैैं। इनेलो को काडर बेस पार्टी माना जाता है। कार्यकर्ताओं का अनुशासन और संगठन के प्रति समर्पण ही इनेलो की मजबूती का बड़ा आधार है।

इनेलो के इतिहास में आज तक ऐसा नहीं हुआ कि चौटाला के सामने किसी ने अनुशासन तोड़ने की हिम्मत दिखाई हो। मगर, गोहाना में ताऊ देवीलाल के जयंती समारोह में ऐसा पहली बार हो गया तो चौटाला इसे बर्दाश्त नहीं कर सके। चौटाला ने अपने ढंग से पता कराया तो पता चला कि इनसो और यूथ विंग में बाहरी लोगों ने घुसपैठ करते हुए पार्टी की छवि बिगाड़ने की कोशिश की।

इनेलो सूत्रों के अनुसार ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान भी कर ली गई थी, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं को अनुशासित रहने का संदेश देने के लिए चौटाला ने दोनों संगठनों को भंग करने से परहेज नहीं किया। उधर, अभय सिंह चौटाला की मेहनत भी इस कार्रवाई का बड़ा आधार बनी है। चौटाला को लग रहा था कि यदि अभी कदम नहीं उठाया गया तो भविष्य में अनुशासनहीनता और बढ़ सकती है।

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इनेलो के नेताअों का कहना है कि चौटाला के जेल जाने के बाद अभय सिंह चौटाला ने छह साल में पार्टी को पूरी मजबूती के साथ खड़ा किया। इनेलो व बसपा के गठबंधन का श्रेय भी अभय चौटाला को ही जाता है। ओमप्रकाश चौटाला अपने छोटे बेटे अभय की इस राजनीतिक पकड़ को समझते हैैं। लिहाजा उन्होंने अभय को आगे कर एक तीर से कई निशाने साधने में सफलता हासिल की है।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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