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रात भर अंधेरे में डूबे कई शहर व गांव, हरियाणा में 40000 बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार; सड़कों पर उतरे लोग

Published: Thu, 22 Oct 2026 04:55 PM (IST)

गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को पैरलल लाइसेंस देने के विरोध में 40 हजार बिजली कर्मचारियों ने तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है।

40 हजार बिजली कर्मचारी हड़ताल पर, रात को अंधेरे में डूबे कई शहर और गांव।

40 हजार बिजली कर्मचारी हड़ताल पर, रात को अंधेरे में डूबे कई शहर और गांव।

HighLights

  1. 40 हजार बिजली कर्मचारियों ने तीन दिवसीय हड़ताल शुरू की

  2. गुरुग्राम-नूंह में निजी कंपनी को पैरलल लाइसेंस का विरोध

  3. हड़ताल से कई शहरों और गांवों में बिजली आपूर्ति ठप

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को पैरलल लाइसेंस देने के विरोध में 40 हजार बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने बृहस्पतिवार से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी।

हड़ताल के पहले ही दिन विभिन्न स्थानों पर बिजली गुल होने से जनजीवन और उद्योग प्रभावित हुए हैं। कर्मचारियों ने फाल्ट ठीक नहीं किए, जिससे करनाल और फरीदाबाद में गुस्साए लोगों ने सड़कों पर जाम लगा दिया। भिवानी के सुरपुरा कलां गांव में खुद ट्रांसफार्मर ठीक करने चढ़े कासनी खुर्द गांव के किसान बलवान (50) की करंट लगने से मौत हो गई।

संयुक्त किसान मोर्चा के घटक संगठनों, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और मजदूर संगठनों सीटू, एटक, इंटक व एआइयूटीयूसी ने हड़ताल का समर्थन करते हुए कई जगह प्रदर्शन किए। इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा और ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शेलेद्र दुबे ने भी पैरलल लाइसेंस का विरोध करते हुए हड़ताल के प्रति एकजुटता जताई है।

ब्रेकडाउन वाले 33 और 11 केवी फीडर बंद पड़े हैं। कई ग्रामीण और शहरी रिहायशी इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप होने से पानी की समस्या पैदा हुई है। औद्योगिक फीडर बंद होने से उत्पादन रुक गया है। बैंक, बीमा और अन्य वित्तीय संस्थानों को भी दिक्कतें हो रही हैं। ट्रांसफार्मर के फ्यूज उड़ने और बिजली खराबी की शिकायतों का निवारण नहीं हो पा रहा। शिकायत केंद्र, सब स्टेशन और बिजली विभाग के कार्यालय सुनसान दिखे।

हिसार और पंचकूला मुख्यालयों में भी लगभग सभी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। गुरुग्राम, हांसी, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़, झज्जर, फरीदाबाद, पानीपत, रोहतक, जींद, कैथल, करनाल, यमुनानगर और अंबाला हड़ताला का खासा असर देखने को मिला।

कर्मचारी नेताओं ने बिजली की परेशानी झेल रही जनता से माफी मांगते हुए कहा कि यह आंदोलन किसानों और उपभोक्ताओं को वहनीय दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए है। निजीकरण से बिजली किसानों और ग्रामीण व शहरी गरीबों की पहुंच से बाहर हो सकती है।

पड़ोसी राज्यों से कर्मचारी बुलाने के प्रयास

बिजली सेवाएं बाधित नहीं होने देने के लिए प्रदेश सरकार पंजाब और हिमाचल प्रदेश से तकनीकी कर्मचारी व सुपरवाइजर बुलाने का प्रयास कर रही है। नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स ने पंजाब, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के संगठनों से कर्मचारियों को हरियाणा न भेजने को कहा है। लांबा ने आरोप लगाया कि सरकार पैरलल लाइसेंस रोकने के बजाय कर्मचारियों को एस्मा लगाने की धमकी दे रही है।

एचईआरसी के फैसले को रद करे सरकार: प्रो. संपत सिंह

पूर्व वित्त मंत्री एवं इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तत्काल विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 का इस्तेमाल करते हुए एचईआरसी के फैसले को रद करें।

समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस का यह निर्णय राज्य के बिजली निगमों के कर्मचारियों, अभियंताओं और अन्य हितधारकों के लिए गंभीर परिचालन एवं वित्तीय संकट पैदा करेगा तथा सार्वजनिक बिजली वितरण व्यवस्था के अस्तित्व पर ही खतरा खड़ा कर देगा। किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं पर भारी वित्तीय बोझ डाल दिया जाएगा।