विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जीरकपुर-शिमला नेशनल हाईवे पर चंडीमंदिर टोल प्लाजा पर रोजाना लगता है जाम, कानूनी लड़ाई से निकलेगा हल

Published: Sun, 25 Oct 2026 06:36 PM (IST)

जीरकपुर-शिमला नेशनल हाईवे-5 पर स्थित चंडीमंदिर टोल प्लाजा पर लंबे जाम और अव्यवस्थाओं के खिलाफ एनएचएआई और टोल कंपनी को ...और पढ़ें

चंडीमंदिर टोल प्लाजा पर रोजाना लगता है लंबा जाम।

चंडीमंदिर टोल प्लाजा पर रोजाना लगता है लंबा जाम।

HighLights

  1. 30 अक्टूबर तक व्यवस्था सुधारने का दिया गया अल्टीमेटम।

  2. स्थानीय निवासियों के एक साल के टोल पास बहाली की मांग।

  3. समाधान नहीं हुआ तो हाईकोर्ट का रुख करेंगे विजय बंसल।

संवाद सहयोगी, पिंजौर (पंचकूला)। जीरकपुर-शिमला नेशनल हाईवे-5 पर स्थित चंडीमंदिर टोल प्लाजा अब आम जनता और मुसाफिरों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बनता जा रहा है।

यहां पर कई राज्यों के लोग रोजाना लंबे जाम में फंसते हैं। आपातकालीन एंबुलेंस और स्थानीय निवासियों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।इन अव्यवस्थाओं के खिलाफ अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है।

शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल एडवोकेट ने चंडीमंदिर टोल प्लाजा की व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर एनएचएआई और टोल संचालन कंपनी को लीगल नोटिस भेजा है।

नोटिस में 30 अक्टूबर तक व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी गई है कि मांगें पूरी नहीं होने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी

विजय बंसल ने आरोप लगाया कि चंडीगढ़ ट्राईसिटी के साथ पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण हाईवे पर टोल व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी है। दिल्ली और राजस्थान समेत अन्य राज्यों से शिमला जाने वाले लोग भी परेशान होते हैं।

बंसल के अनुसार, इस मार्ग पर रोजाना करीब 50 से 52 हजार वाहनों की आवाजाही होती है, जबकि सप्ताहांत में वाहनों की संख्या 60 हजार के पार पहुंच जाती है। इसके बावजूद टोल प्लाजा पर पर्याप्त यातायात प्रबंधन नहीं होने के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नई कंपनी के संचालन के बाद बढ़ी जाम की समस्या

विजय बंसल ने आरोप लगाया कि नई टोल कंपनी के संचालन के बाद टोल प्लाजा पर कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई है। पहले पुरानी कंपनी के पास करीब 50 कर्मचारी कार्यरत थे, लेकिन नई कंपनी द्वारा कर्मचारियों की संख्या घटाए जाने से कई लेन बंद रहती हैं। इसके चलते टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं और यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रही।

आधे घंटे से ज़्यादा का समय अलग रहा

उन्होंने कहा कि वाहन चालकों को टोल पार करने के लिए आधे से एक घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे लोगों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है। सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है, जब आपातकालीन एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं के वाहन जाम में फंस जाते हैं। ऐसे में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में बाधा आने का खतरा बना रहता है।

इमरजेंसी लेन चौड़ी करने की मांग

विजय बंसल ने टोल प्लाजा के दोनों तरफ एक लेन को चौड़ा करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि मौजूदा लेन की चौड़ाई कम होने के कारण वाहनों को आवागमन में परेशानी होती है।

यदि दोनों तरफ एक लेन को थोड़ा और चौड़ा किया जाए, तो एंबुलेंस, वीआईपी वाहनों, सरकारी वाहनों तथा मासिक और वार्षिक टोल पास वाले स्थानीय वाहनों को निकलने में आसानी होगी। इससे सामान्य टोल लेनों पर यातायात का दबाव भी कम किया जा सकेगा।

100 मीटर कतार के नियम पर उठाए सवाल

विजय बंसल ने एनएचएआई के 100 मीटर लंबी कतार संबंधी नियम का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित परिस्थितियों में वाहनों को बिना टोल दिए निकालने का प्रविधान होने के बावजूद इसका पालन नहीं हो रहा।

उनके अनुसार, नियमों की अनदेखी के कारण वाहन चालकों को लंबे समय तक कतारों में खड़ा रहना पड़ता है और लोगों में टोल प्रबंधन के प्रति रोष बढ़ रहा है।

स्थानीय निवासियों को तीन महीने का पास देने पर आपत्ति

लीगल नोटिस में स्थानीय निवासियों के टोल पास की वैधता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। विजय बंसल ने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के आदेशों के विपरीत स्थानीय लोगों को एक साल की वैधता वाला पास देने के बजाय केवल तीन महीने की अवधि का पास दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय निवासियों को बार-बार अपना पास रिन्यू करवाने के लिए टोल प्लाजा के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों को राहत देने के बजाय उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मांग की कि स्थानीय निवासियों के टोल पास की एक साल की वैधता बहाल की जाए और पास रिन्यूअल की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, ताकि लोगों को बार-बार टोल प्लाजा जाने की जरूरत न पड़े।

ऑनलाइन रिन्यूअल और यूपीआई भुगतान की सुविधा बंद 

विजय बंसल ने आरोप लगाया कि टोल पास के ऑटोमैटिक फास्टैग कटौती और गूगल पे तथा यूपीआई के माध्यम से ऑनलाइन रिन्यूअल की सुविधा बंद होने से स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

उन्होंने कहा कि टोल प्लाजा पर मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने के कारण यूपीआई भुगतान भी कई बार असफल हो जाता है। ऐसे में वाहन चालकों को भुगतान और पास रिन्यूअल के लिए लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।

उन्होंने मांग की कि ऑनलाइन रिन्यूअल और डिजिटल भुगतान की सुविधा दोबारा शुरू की जाए। साथ ही टोल प्लाजा पर हैंड-हेल्ड स्कैनर उपलब्ध करवाए जाएं, ताकि स्थानीय निवासियों और पास धारकों के वाहनों की जांच तेजी से हो सके और उन्हें अनावश्यक रूप से कतारों में न खड़ा होना पड़े।