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अब बिना पोस्टमार्टम पता चलेगा मौत का कारण! रोहतक में 5000 मौतों पर होगी वर्बल ऑटोप्सी; परिजनों के लिए जाएंगे इंटरव्यू

Published: Tue, 06 Oct 2026 06:16 PM (IST)

हरियाणा में अब उन मौतों के कारणों का पता लगाने के लिए 'वर्बल आटोप्सी' परियोजना शुरू की जा रही है, जिनका चिकित्सकीय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

मौत का कारण जानने का नया तरीका, रोहतक में पांच हजार मौतों पर होगी वर्बल आटोप्सी।

मौत का कारण जानने का नया तरीका, रोहतक में पांच हजार मौतों पर होगी वर्बल आटोप्सी।

HighLights

  1. रोहतक में 'वर्बल आटोप्सी' परियोजना का पायलट परीक्षण शुरू

  2. बिना मेडिकल रिकॉर्ड वाली मौतों के कारण का पता चलेगा

  3. परिजनों से जानकारी लेकर मृत्यु का संभावित कारण तय होगा

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में अब उन मौतों के कारणों की जानकारी जुटाने की कोशिश की जाएगी, जिनका चिकित्सकीय रिकार्ड उपलब्ध नहीं है या जिनमें मृत्यु का स्पष्ट कारण दर्ज नहीं हो पाता।

इसके लिए रोहतक जिले में ‘वर्बल आटोप्सी’ परियोजना का पायलट परीक्षण किया जाएगा। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा वित्तपोषित इस परियोजना को एम्स नई दिल्ली के नेतृत्व में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से संचालित किया जाएगा।

वर्बल आटोप्सी का सरल अर्थ है मृत व्यक्ति के बारे में उसके परिजनों या मृत्यु के समय मौजूद लोगों से व्यवस्थित तरीके से जानकारी लेना। इसमें किसी शव का पोस्टमार्टम नहीं किया जाता।

इसके बजाय स्वास्थ्य विभाग के प्रशिक्षित कर्मचारी परिवार के सदस्यों से सवाल पूछकर यह जानकारी जुटाते हैं कि व्यक्ति को मृत्यु से पहले क्या बीमारी थी, उसके क्या लक्षण थे, इलाज कहां हुआ, कितने समय से परेशानी थी और मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई।

यह पूरी प्रक्रिया एक निर्धारित मोबाइल एप के माध्यम से की जाएगी। यानी स्वास्थ्य कर्मी कागज पर अलग-अलग तरीके से जानकारी दर्ज करने की बजाय तय प्रारूप में डिजिटल जानकारी भरेंगे। इसके बाद एक मेडिकल ऑफिसर इस जानकारी की समीक्षा करेंगे और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर मृत्यु का संभावित कारण तय करेंगे।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार इस परियोजना के तहत करीब पांच हजार मौतों को शामिल किया जाएगा और इसका कार्यान्वयन लगभग आठ माह तक चलेगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु किन परिस्थितियों में और किस संभावित बीमारी या कारण से हुई।

सुमिता मिश्रा के अनुसार इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति की मृत्यु के बारे में केवल रिकार्ड तैयार करना नहीं, बल्कि मृत्यु के कारणों का जिला स्तर पर बेहतर आंकड़ा तैयार करना है। मसलन, यदि किसी क्षेत्र में किसी खास बीमारी, दुर्घटना या अन्य कारण से मौतों का पैटर्न अधिक सामने आता है तो स्वास्थ्य विभाग उसी के अनुसार अपनी योजनाओं और संसाधनों को प्राथमिकता दे सकेगा।

परियोजना में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर और मेडिकल ऑफिसर की भूमिका रहेगी। संबंधित कर्मचारियों को वर्बल आटोप्सी की प्रक्रिया और मोबाइल एप के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक पूर्ण वर्बल आटोप्सी के लिए कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर तथा उसकी समीक्षा कर मृत्यु का कारण तय करने वाले मेडिकल ऑफिसर को 100-100 रुपये का मानदेय निर्धारित किया गया है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि रोहतक में मौजूदा स्वास्थ्य ढांचे के जरिये यह पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा। इसके अनुभव से भविष्य में मृत्यु के कारणों की जानकारी जुटाने और उसे व्यवस्थित ढंग से दर्ज करने की व्यवस्था को अधिक मजबूत करने में मदद मिल सकती है।