जेएनएन, चंडीगढ़। कृषि कानूनों के खिलाफ सोनीपत में कुंडली बार्डर और बहादुरगढ़ में टीकरी बार्डर पर तीन महीने से धरने पर बैठे किसानों के कारण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में छोटे एवं मध्यम उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन (आरजेयूवीएस) ने इन प्रदर्शनकारियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग उठाई है। कुंडली बार्डर को बंद करने से करीब 1700 उद्योग और बहादुरगढ़ में 700 उद्योगों में न तो कच्चा माल आ रहा और न तैयार माल बाहर जा पा रहा है।

संगठन के चंडीगढ़ में शनिवार को शुरू हुए दो दिवसीय अधिवेशन में यह मुद्दा उठा। अधिवेशन में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश व गुजरात के लघु एवं सूक्ष्म उद्यमी और खुदरा व्यापारी भाग ले रहे हैं। अधिवेशन में ई-कामर्स कंपनियों और आनलाइन बाजार को प्रमोट करने की आड़ में छोटे व्यापारियों और एमएसएमई को बर्बाद करने का आरोप जड़ा गया।

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राष्ट्रीय जन उद्योग संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा कि हालांकि वह कृषि कानूनों में सुधारों के खिलाफ आंदोलनरत लोगों के साथ हैं, लेकिन सरकार को इन्हें बार्डर से शिफ्ट कर दिल्ली में जंतर-मंतर या दूसरे स्थानों पर शिफ्ट करना चाहिए। इससे प्रभावित क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां शुरू हो सकेंगी। बिजली की दरें सस्ती करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि ई- कामर्स कंपनियों के कारोबार में हर साल 27 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। इससे छोटा दुकानदार, खुदरा व्यापारी और सूक्ष्म उद्यमी पूरी तरह से तबाह हो जाएगा। सरकार एमएसएमई को प्रमोट करे।

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संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित गुप्ता ने कहा कि देश मे साढ़े छह करोड़ एमएसएमई यूनिट हैं, जिनके जरिये 11 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। लघु उद्यमियों व खुदरा व्यापारियों द्वारा जीडीपी में 30 फीसद योगदान, 95 फीसद उत्पादन और निर्यात में 40 फीसद योगदान के बावजूद बैंकिंग लोन में एमएसएमई को 16 फीसद हिस्सा ही दिया जाता है।

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संगठन के राष्ट्रीय सलाहकार संतोष मंगल ने नामचीन ई-कामर्स कंपनियों के दफ्तरों को ताला जडऩे की घोषणा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया तथा अन्य प्लेटफार्म के जरिये ई कामर्स बाजार के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। आरजेयूवीएस के हरियाणा अध्यक्ष गुलशन डंग व महासचिव पवन अग्रवाल ने एमएसएमई से जुड़े कई मुद्दे उठाए।

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