जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में सरसों उत्पादक किसानों से प्रदेश सरकार केवल 25 फीसद फसल ही सीधे खरीदेगी। केंद्र सरकार के लिए हरियाणा स्टेट कोऑपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन (हैफेड) तीन लाख आठ हजार 700 मीट्रिक टन सरसों और 12 हजार 750 मीट्रिक टन चने की खरीद करेगी। भारतीय किसान यूनियन ने इसे नाकाफी बताते हुए सवाल उठाए हैं।

भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष सरदार गुरनाम सिंह ने बताया कि 15 अप्रैल से 30 जून तक सरसों का बीज 4425 रुपये प्रति क्विंटल और चना 4875 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जाएगा। पूरे प्रदेश में 71 सेंटरो पर यह खरीद होगी। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत किसानों से ही आठ क्विंटल प्रति एकड़ सरसों और 3.83 क्विंटल प्रति एकड़ चना न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। फसल का भुगतान सीधा किसान के खाते में आएगा।

भाकियू प्रवक्ता राकेश कुमार बैंस ने कहा कि खरीद सेंटरो की संख्या बहुत कम है। यह खरीद सेंटर हर मंडी में होने चाहिए, न कि जिले की मात्र एक मंडी में। कुरुक्षेत्र और अंबाला में पूरे जिले में एक-एक मंडी को ही खरीद सेंटर बनाया गया है जिसमें सारे जिले का उत्पादन खरीदना संभव नहीं। जिन जिलों में फसल का उत्पादन ज्यादा है, वहां हर मंडी व कम उत्पादन वाले जिलों में ब्लाक स्तर की मंडी में खरीद सेंटर जरूर बनाया चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों से केवल 25 फीसद सरसों ही खरीदने की शर्त भी गलत है। किसान बाकी फसल कहां लेकर जाएंगे। इससे उन्हें मजबूरन बेहद कम दामों पर अपनी फसल व्यापारियों को भेजनी पड़ेगी।

तुगलकी फरमान वापस ले सरकार : सैलजा

हरियाणा कांग्रेस की प्रधान कुमारी सैलजा ने कहा कि फसल की खरीद रजिस्ट्रेशन के माध्यम से होना, किसानों को खुद ही भंडारण की व्यवस्था करना, फसल खरीद का जून माह तक चलना जैसे फैसले पूरी तरह से किसान विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि पहले ही बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को बड़ा नुकसान हो चुका है। अब कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते उसे न तो फसल कटाई की मशीनें उपलब्ध हो पा रही हैं और न ही मजदूर उपलब्ध हैं। ऐसे समय में यह फैसले किसानों के लिए और ज्यादा परेशानी बढ़ाने वाले हैं।

कुमारी सैलजा ने कहा कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले किसान कहां जाएंगे। क्या उनकी फसल खरीद नहीं होगी। कई छोटे किसान आढ़तियों से ऋण लेकर फसल बुवाई करते हैं। यदि फसल का भुगतान देरी से मिलेगा तो इन्हें अगली फसल की बुवाई के लिए आढ़तियों से ऋण नहीं मिल पाएगा। इससे आढ़तियों और किसानों के संबंधों पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार अपना तुगलकी फरमान वापस ले।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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