चंडीगढ़ [अनुराग अग्रवाल]। हरियाणा में खाली हुई राज्यसभा की दो सीटों के लिए भाजपा में लाबिंग शुरू हो गई है। इन दोनों सीटों पर भाजपा के कद्दावर नेताओं की निगाह है। भाजपा के यह नेता भले ही विधानसभा चुनाव हार गए, लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, सरकार और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ है। भाजपा चुनाव हारे हुए इन नेताओं की न तो अहमियत कम करेगी और न ही उन्हें सरकार व संगठन के कार्यों में नजर अंदाज किया जाएगा।

हरियाणा में राज्यसभा की पांच सीटें हैं। इनेलो के कोटे से राज्यसभा पहुंचे रामकुमार कश्यप भाजपा के टिकट पर इंद्री से विधायक बनने के बाद राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। अब यह सीट खाली है। भाजपा के कोटे से राज्यसभा पहुंचे चौ. बीरेंद्र सिंह का राज्यसभा से इस्तीफा भी स्वीकार हो चुका है। यह सीट भी अब खाली हो चुकी है। कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य कु. सैलजा का कार्यकाल अगले साल पूरा हो रहा है। लिहाजा हरियाणा में रामकुमार कश्यप और कु. सैलजा की सीटों पर उपचुनाव होगा तथा बीरेंद्र सिंह की खाली सीट पर चुनाव कराया जाएगा।

विधायकों की संख्या के आधार पर रामकुमार कश्यप और बीरेंद्र सिंह की सीटें भाजपा के खाते में ही रहेंगी, जबकि कु. सैलजा की सीट कांग्रेस के कोटे में रहेगी। ऐसे में भाजपा में दो सीटों के लिए जबरदस्त लाबिंग चल रही है। भाजपा सूत्रों के अनुसार रामकुमार कश्यप पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। लिहाजा उनके इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर पिछड़ा वर्ग के अथवा किसी गैर जाट नेता को राज्यसभा भेजा जा सकता है। इसके लिए प्रो. रामिबलास शर्मा और मनीष ग्रोवर के नाम लिए जा रहे हैं। दोनों की गिनती भाजपा के दिग्गज नेताओं में होती है।

हरियाणा में भाजपा के पास जाट नेताओं के रूप में ओमप्रकाश धनखड़ और कैप्टन अभिमन्यु दो बड़े चेहरे हैं। भाजपा का शीर्ष और प्रांतीय नेतृत्व इन दोनों चेहरों को किसी सूरत में नजरअंदाज नहीं कर सकता। दोनों की पार्टी हाईकमान में मजबूत पकड़ है और दोनों ही संगठन से चलकर सरकार तक पहुंचे हैं। बीरेंद्र सिंह के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई सीट पर राज्यसभा के लिए ओमप्रकाश धनखड़ और कैप्टन अभिमन्यु की मजबूत दावेदारी बनती है। हालांकि पार्टी प्रो. रामबिलास शर्मा, मनीष ग्रोवर और ओमप्रकाश धनखड़ से संगठन का काम लेने पर भी गंभीरता से विचार कर रही है।

पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में अच्छी पैठ है। लिहाजा उन्हें प्रदेश के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी संगठन की अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। कैप्टन पहले भी अमित शाह की टीम में रह चुके हैं, जबकि पूर्व कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ किसान मोर्चा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राजनीति में सक्रिय रहते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के नजदीक हैं। संगठन में उनकी बात को अहमियत दी जाती है।

भाजपा के चुनाव हारे मंत्री कृष्ण कुमार बेदी की कोशिश मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नजदीक रहते हुए सीएमओ में एंट्री पाने की है, जबकि पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री कविता जैन के पति पूर्व मीडिया एडवाइजर राजीव जैन को संगठन के साथ सरकार में भी प्रतिनिधित्व मिल सकता है। राज्य में दिसंबर के अंतिम सप्ताह और जनवरी के पहले पखवाड़े तक प्रदेश अध्यक्ष पद पर नई नियुक्ति कर दी जाएगी। इस पद को हासिल करने के लिए भी पार्टी में लाबिंग चल रही है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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