जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप डी) की नौकरियों में अब यदि किसी परिवार की बहन-बेटी सरकारी नौकरी में है तो उसका असर भाई पर नहीं पड़ेगा। सामाजिक-आर्थिक शर्तों तथा अनुभव के आधार पर दी जाने वाली 10 अंकों की वरीयता के मामले में खंड-दो में शामिल बहन-बेटी शब्द को सरकार ने हटा लिया है। इसका फायदा उन युवाओं को होगा, जिनके परिवार में बहन और बेटी है मगर उनकी नौकरी लग जाने की स्थिति में बाकी दावेदार (भाइयों) को नौकरी नहीं मिल सकती थी। अब दूसरे दावेदार एक भाई को भी वरीयता अंकों का लाभ मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया है। भाजपा सांसदों और विधायकों ने मुख्यमंत्री का ध्यान इस खामी की तरफ दिलाया था। मुख्यमंत्री को बताया गया कि जिस घर में बहन-बेटी होती है, विवाह के बाद वह अपनी ससुराल चली जाती है, मगर चूंकि वह नौकरी पा चुकी होती है तो उसके किसी दूसरे भाई को सिर्फ इस आधार पर नौकरी में 10 अंकों की वरीयता का पात्र नहीं माना जाता, क्योंकि बहन और बेटी नौकरी हासिल कर चुकी होती है।

मुख्यमंत्री विधायकों की बेटी व बहन को पराया धन समझने की भावना को महसूस कर गए, लेकिन उन्होंने उल्टे विधायकों से कहा कि हम बेटी व बहन के साथ-साथ भाई को भी योजना का लाभ दे सकते हैं। इसलिए कैनिबेट की बैठक में नियम बदलकर परिवार के एक अन्य सदस्य को भी वरीयता अंकों का लाभ देने का अहम निर्णय लिया गया है।

प्रदेश सरकार पर तृतीय श्रेणी की नौकरियों में भी बहन व बेटी शब्द हटाने का दबाव है, लेकिन राज्य सरकार ने अभी इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। तृतीय व चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में इंटरव्यू सरकार पहले ही खत्म कर चुकी है।

आर्थिक व सामाजिक पिछड़े परिवारों के लिए यह थी योजना

हरियाणा सरकार ने नौकरियों में आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े परिवारों को तवज्जो देने के लिए हाल ही में एक नीति बनाई है। इस नीति में ऐसे परिवारों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता देने की बात कही गई है, जिनके परिवार के एक भी सदस्य को सरकारी नौकरी नहीं मिली हुई। ऐसे में उन परिवारों के युवाओं के सामने दिक्कत आनी शुरू हो गई थी, जिनके परिवार में बहन-बेटी को नौकरी मिल चुकी है।

दो भाई और एक बहन के मामले में आ रही थी दिक्कत

हरियाणा सरकार की नीति का एक कमजोर पक्ष यह था कि यदि किसी परिवार में दो भाई और एक बहन है और बहन को नौकरी मिल गई तो दोनों भाइयों के रोजगार का रास्ता तो बंद हो गया था। ग्रामीण पृष्ठभूमि के उन युवाओं का रास्ता रुक गया, जो गांवों के ही स्कूल में पढ़े-लिखे है। लिखित परीक्षा के साथ-साथ शैक्षणिक योग्यता और अंकों का भी काफी अंतर गांवों एवं शहरी युवाओं के बीच इससे आ रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह नीति बनाई थी।

यह भी पढ़ेंः सपना चौधरी के ठुमकों से हरियाणा की सियासत में चढ़ी गर्मी

Posted By: Kamlesh Bhatt

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप