जेएनएन, चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मौजूदा मुख्यमंत्री मनोहर लाल भले ही नीतिगत मामलों में तमाम असहमतियां रखते हों और एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हों, लेकिन विधायकों पर की जाने वाली मेहरबानियों को लेकर दोनों में सहमति है। इसीलिए हुड्डा सरकार से लेकर मौजूदा मनोहर सरकार ने विधायकों को मिलने वाले वेतन पर इनकम टैक्स का भुगतान सरकारी खजाने से कर दिया, भले ही यह कानून गलत था।

कानून बनाने वालों के लिए ही टूटा कानून, विधायकों के वेतन पर टैक्स भुगतान

सिर्फ मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के वेतन पर इनकम टैक्स का भुगतान सरकारी खजाने से करने का प्रावधान है। विधानसभा सचिवालय से विधायकों को वेतन के अलावा जो भत्ते मिलते हैैं, उन्हीं पर ही इनकम टैक्स का भुगतान सरकार कर सकती है।

इसके बावजूद हरियाणा में पिछले पांच साल से 76 विधायकों के वेतन और भत्ते दोनों पर ही इनकम टैक्स का भुगतान किया जा रहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता अंबाला शहर निवासी हेमंत कुमार ने विधानसभा सचिवालय से विधायकों के इनकम टैक्स भुगतान की जानकारी मांगी थी। विधानसभा के राज्य सूचना अधिकारी शोभित शर्मा ने करीब एक माह की जांच पड़ताल के बाद माना कि विधायकों के वेतन पर इनकम टैक्स का भुगतान गलत किया जा रहा है, जबकि भत्तों पर इनकम टैक्स के भुगतान की जिम्मेदारी विधानसभा सचिवालय की है।

एडवोकेट हेमंत कुमार के अनुसार अधिनियम के मुताबिक विधायकों के वेतन को आयकर मुक्त आय नहीं माना जा सकता, मगर विधानसभा सचिवालय यहां गच्चा खा गया और विधायकों को मिलने वाले वेतन पर भी आयकर का भुगतान कर दिया। सितंबर 2010 से पहले विधायकों को वेतन नहीं मिलता था। उन्हें सिर्फ भत्ते दिए जाते थे। सात सितंबर 2010 से पिछली हुड्डा सरकार ने विधायकों को भत्तों के अलावा 10 हजार रुपये मासिक वेतन देना शुरू किया। फिर यह 30 हजार रुपये मासिक तक पहुंचा। भाजपा सरकार के कार्यकाल में विधायकों का वेतन अब तक 40 हजार रुपये मासिक दिया जा रहा है।

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अब तक हो चुका इतना भुगतान

1 अप्रैल 2013 से मार्च 2018 तक पांच सालों में विधायकों के वेतन पर 48 लाख 14 हजार 220 रुपये का भुगतान हुआ है। विधानसभा सचिवालय ने इसे गैर वाजिब भी मान लिया है। हरियाणा विधानसभा सदस्य (वेतन, भत्ते एवं पेंशन ) अधिनियम 1975 की धारा आठ के तहत विधायकों को प्राप्त होने वाले सिर्फ भत्तों पर आयकर का भुगतान राज्य सरकार करेगी। इस धारा में विधायकों को मिलने वाले वेतन का कहीं जिक्र नहीं है।

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वेतन मिलने के बाद पहले तीन साल नहीं हुआ टैक्स का भुगतान

हरियाणा सरकार ने 7 सितंबर 2010 से 31 मार्च 2013 तक विधायकों के वेतन पर इनकम टैक्स का कोई भुगतान नहीं किया। 1 अप्रैल 2013 से 31 मार्च 2014 तक 3 लाख 91 हजार 400 रुपये के इनकम टैक्स का भुगतान वेतन राशि पर किया गया। 1 अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2015 तक 8 लाख 61 हजार 80 रुपये के इनकम टैक्स और एजुकेशन सेस का भुगतान सचिवालय की ओर से किया गया।

1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 तक भी यही राशि रही। 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक सबसे अधिक 18 लाख 440 रुपये के इनकम टैक्स तथा सेस का भुगतान विधायकों के वेतन पर हुआ। 1 अप्रैल 2017 से मार्च 2018 तक संशोधित स्लैब के आधार पर 9 लाख 220 रुपये के इनकम टैक्स का भुगतान हुआ।

सरकार को करना चाहिए कानून में संशोधन

आरटीआइ एक्टिविस्ट एडवोकेट हेमंत कुमार के अनुसार, पंजाब सरकार ने सीएम एवं मंत्रियों के इनकम टैक्स का भुगतान उनके खुद के खाते से करने का निर्णय लिया है। यह हरियाणा में भी लागू होना चाहिए। उन्होंने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, संसदीय कार्य मंत्री और स्पीकर को पत्र लिखकर अधिनियम की विसंगति को दूर किए जाने की मांग की है।

हेमंत कुमार के अनुसार, यदि सरकार चाहती है कि विधायकों के वेतन का इनकम टैक्स वह खुद ही भरती रहे तो इस उपक्रम को अधिनियम में जुड़वाना होगा। सांसदों को हालांकि अपने वेतन और भत्ते दोनों पर आयकर का  भुगतान अपनी जेब से ही करना पड़ता है।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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