जागरण संवाददाता, पंचकूला : पिछले डेढ़ साल से हरियाणा के 10 जिलों में शुरू हुए जीरो विजन से पंचकूला कहीं आगे निकलता नजर आ रहा है। विजन जीरो एक परियोजना है, जो स्वीडन से बेहतर इंजीनियरिंग और यातायात कानूनों के प्रवर्तन द्वारा मौतों में कमी लाने के लिए हरियाणा के सीएम द्वारा शुरू करवाई गई थी। इस योजना में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का प्रतिशत शून्य लाने के लिए प्रयास किए जाने थे। पहले फेज में अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत, गुरुग्राम, झज्जर, हिसार, रोहतक और रेवाड़ी का चयन वर्ष 2017 में किया गया था। पंचकूला को इस फेज से बाहर रखा गया था। परंतु नगर निगम द्वारा जीरो विजन को पंचकूला में लागू करने की मांग को कहीं कारणों से ठुकरा दिया गया था। नगर निगम ने पंचकूला निगम क्षेत्र में लोगों की सड़क हादसों में हो रही मौतों को देखते हुए डेढ़ माह पूर्व अपने स्तर पर जीरो विजन पर काम शुरू कर दिया है। निगम ने पूरे आंकड़े जुटाने के बाद शहर में एक बैल कॉरिडोर बनाने पर काम शुरू किया है, जिससे सड़क हादसों में कमी आए। इस कॉरिडोर में पैदल, साइकिल और कार से चलने वालों के लिए अलग-अलग ट्रैक होंगे। प्रदेश के 10 जिलों में सरकार ने एक सड़क सुरक्षा सहयोगी नियुक्त किया है, जिसका काम सड़क सुरक्षा और सड़क आकस्मिक विश्लेषण करना था। सड़कों आदि में सुधार लाने और बेहतर प्रवर्तन के लिए उपचारात्मक उपायों का प्रस्ताव था। हालाकि एमसी के अनुरोध के बावजूद पंचकूला में कोई सड़क सुरक्षा सहयोगी नियुक्त नहीं किया गया था, लेकिन एमसी सीएम के जीरो विजन को पंचकूला में लागू करने के लिए सड़क सुरक्षा सलाहकार वदीप असिजा नियुक्त किया है। असीजा ने यह रिपोर्ट केवल 6 महीने में तैयार की है। दो वर्षो का डाटा किया गया इकट्ठा

पिछले दो वर्षो से सड़क दुर्घटनाओं का डाटा एकत्रित किया गया और उपायों की योजना बनाई गई। पंचकूला एमसी में सड़क (एम1, एम2, एम3 और राष्ट्रीय राजमार्ग) और अन्य सड़कों समेत सभी एमसी सड़कों की कुल लंबाई 335 किलोमीटर है। कोर सड़कों में 115 और 17.2 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग का भाग

इन कोर सड़कों में से 115 और 17.2 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा हैं। इस 17.2 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुल 17 मौतें हुई हैं, जबकि शेष 98 किलोमीटर पर कुल 13 मौतें हुई हैं। 174 सीआरपीसी के तहत सड़क दुर्घटनाग्रस्त मौतों पर कोई विचार नहीं किया जाता। राष्ट्रीय राजमार्ग पर 57 प्रतिशत मौतें और एमसी रोड पर 43 प्रतिशत की मौत हुई हैं। इन मौतों में से 53 प्रतिशत साइकिल चालक और पैदल चलने वाले हैं। इन निष्कषरें के आधार पर नगर निगम ने पंचकूला में एक बेल कॉरिडोर बनाने पर काम शुरू कर दिया है। गोल चक्कर पर बनेगा पैदल पथ

कॉरिडोर में गोल चक्कर के पास पैदल यात्री पथ का निर्माण किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग के सुरक्षा मुद्दों का पालन करने के लिए एमसी प्रशासक ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को पत्र लिख दिया है। 24 दुर्घटना वाले क्षेत्रों और 3 ब्लैक स्पॉट की पहचान की गई, जहां गंभीर दुर्घटनाएं होती है। 2 ब्लैक स्पॉट राष्ट्रीय राजमार्ग पर और एक एमसी एरिया में आते हैं। 24 आकस्मिक दुर्घटना वाले क्षेत्रों में 13 राष्ट्रीय राजमार्ग और 11 एमसी क्षेत्र में गिरते हैं। बढ़ रहे हादसों को देख लिया फैसला : जोगपाल

नगर निगम के प्रशासक राजेश जोगपाल ने बताया कि जीरो विजन में हालांकि पंचकूला को शामिल नहीं किया गया था, लेकिन सड़क हादसों के आंकड़ों को देखते हुए हमने इस पर काम किया है। 6 महीने में रिपोर्ट तैयार हो गई है और अब शहर के बीच बनने वाले बैल कॉरिडोर से सड़क हादसों में कमी आएगी।

Posted By: Jagran