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'वकील होने का मतलब यह नहीं कि अदालत पर दबाव बनाएं...', पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने लगाई फटकार

Published: Fri, 11 Sep 2026 05:05 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक वकील को पीठ से अलग होने की मांग करने पर कड़ी फटकार लगाई, ...और पढ़ें

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने वकील को लगाई फटकार।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने वकील को लगाई फटकार।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने वकील की पीठ से अलग होने की मांग खारिज की

  2. अदालत ने कहा, वकील होने से दबाव बनाने की अनुमति नहीं

  3. न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होगी, वैध आधार जरूरी है

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पीठ से अलग होने की मांग करने वाले एक वकील को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल इसलिए कि कोई पक्षकार हाई कोर्ट में वकालत करता है, उसे अदालत पर दबाव बनाने की अनुमति दे दी जाए।

जस्टिस अलका सरीन और जस्टिस मोनिका छिब्बर शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि यदि पक्षकारों के कहने मात्र पर पीठ से अलग होने की मांग स्वीकार की जाने लगी तो न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होगी।

मामला एक पारिवारिक अपील की सुनवाई से जुड़ा था, जिसमें अपीलकर्ता स्वयं हाई कोर्ट में वकील है और सुनवाई के दौरान खुद पैरवी कर रहा था। अदालत ने अपने आदेश में पिछली सुनवाइयों का भी उल्लेख किया। मामला 19 अगस्त को सूचीबद्ध था।

पहली पुकार पर इसे आगे के लिए रख दिया गया। दूसरी पुकार पर अपीलकर्ता की ओर से स्थगन की मांग की गई, जिसे न्याय के हित में स्वीकार करते हुए सुनवाई 25 अगस्त के लिए स्थगित कर दी गई। 25 अगस्त को भी अपीलकर्ता के वकील के अनुरोध पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ा दी गई और अगली तारीख नौ सितंबर निर्धारित की गई।

नौ सितंबर को अपीलकर्ता स्वयं अदालत में पेश हुआ। हालांकि, उसने मामले में बहस करने की बजाय पीठ से अलग होने का अनुरोध कर दिया।पीठ ने इस मांग को स्वीकार करने से इन्कार करते हुए मामले को कुछ समय के लिए आगे कर दिया। बाद में जारी आदेश में अदालत ने कहा कि ऐसी मांगों को पक्षकारों के कहने मात्र पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

पीठ ने कहा कि यदि ऐसी मांगों को केवल पक्षकार के अनुरोध पर स्वीकार किया जाने लगा तो जब भी किसी पक्षकार को लगेगा कि पीठ उसके पक्ष में सहमत नहीं है या उससे कोई असहज सवाल पूछा जा रहा है, वह पीठ से अलग होने की मांग करने लगेगा। इससे न्यायिक कार्यवाही की निष्पक्षता और निरंतरता प्रभावित होगी।

अदालत ने विशेष रूप से कहा कि केवल इसलिए वर्तमान मामले में अपीलकर्ता इस अदालत में वकालत करने वाला वकील है, उसे अदालत पर दबाव बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कानून की स्थापित स्थिति के अनुसार किसी पक्षकार को पीठ से अलग होने का अधिकार नहीं है। इसके लिए ठोस और वैध आधार होना जरूरी है।

अदालत को मामले में ऐसा कोई आधार नहीं मिला, इसलिए अपीलकर्ता की पीठ से अलग होने की मांग खारिज कर दी गई। इसके बाद अपीलकर्ता ने स्वयं पेश होकर कहा कि वह मामले में बहस नहीं करना चाहता।

न्याय के हित में हाई कोर्ट ने उसे एक और अवसर देते हुए सुनवाई 28 जनवरी 2027 तक स्थगित कर दी। हाई कोर्ट ने साथ ही स्पष्ट किया कि इस अपील के लंबित रहने से पारिवारिक अदालत में चल रही कार्यवाही पर कोई रोक नहीं लगेगी। पीठ ने आदेश दिया कि वर्तमान अपील की लंबित स्थिति पारिवारिक अदालत की कार्यवाही जारी रखने में बाधा नहीं बनेगी।

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