30 साल बाद किशाऊ बांध पर 6 राज्यों में समझौता, हरियाणा को मिलेगा 1280 क्यूसेक पानी, अमित शाह की मौजूदगी में लगी मुहर
दशकों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर छह राज्यों के बीच हुए समझौते से हरियाणा को लगभग 1280 क्यूसेक पानी मिलेगा।
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किशाऊ समझौते से हरियाणा को मिलेगा 1280 क्यूसेक पानी, दशकों बाद सुलझा जल विवाद।
HighLights
हरियाणा को किशाऊ समझौते से 1280 क्यूसेक पानी मिलेगा।
दशकों से लंबित परियोजना अब प्रधानमंत्री के प्रयासों से आगे बढ़ेगी।
सिंचाई, पेयजल योजनाओं को मजबूत कर भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। दशकों से अटकी किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर छह राज्यों के बीच हुए समझौते व अन्य साधनों से हरियाणा को करीब 1280 क्यूसेक पानी मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुए समझौते के बाद हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस पानी का उपयोग प्रदेश में सिंचाई और पेयजल योजनाओं को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।
पानी की कमी वाले हरियाणा के लिए यह समझौता यमुना बेसिन में भविष्य की जल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि कई दशक से परियोजना लटकी थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयास से अब आगे बढ़ने जा रही है।
सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास इस नारे के साथ प्रधानमंत्री देश को विकसित करने में लगे हुए हैं। उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर टोंस नदी पर बनने वाली परियोजना में 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल संग्रहण होगा। परियोजना से 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 1,476 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन प्रस्तावित है। इसका करीब 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। इससे राज्यों पर वित्तीय बोझ भी सीमित रहेगा।
विवाद की पृष्ठभूमि में 1994 का यमुना समझौता
किशाऊ का मामला नया नहीं है। छह ऊपरी यमुना बेसिन राज्यों ने 12 मई 1994 को यमुना के पानी के बंटवारे और मानसूनी पानी के भंडारण के लिए समझौता किया था। इसके तहत किशाऊ, रेणुकाजी और लखवार जैसी भंडारण परियोजनाओं पर अलग-अलग समझौते होने थे।
लेकिन राज्यों के बीच पानी, बिजली और परियोजना लागत के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाई और किशाऊ करीब तीन दशक तक अटका रहा। 1994 में किशाऊ परियोजना को लेकर अलग समझौता भी हुआ था।
हरियाणा के लिए क्यों है परियोजना का महत्व
हरियाणा के लिए इन परियोजनाओं का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि राज्य लगातार ऊपरी यमुना में भंडारण बढ़ाने की मांग करता रहा है। 2018 में लखवार परियोजना पर राज्यों के बीच सहमति बनी। इसके बाद रेणुकाजी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 2019 में समझौता हुआ। दोनों परियोजनाओं से यमुना में पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
भविष्य की पानी की जरूरत को सुरक्षित किया गया
इसके अलावा 2026 में हरियाणा-राजस्थान के बीच 1994 के यमुना जल समझौते को लागू करने के लिए अलग एमओयू हुआ, जिसके तहत राजस्थान को उसके हिस्से का पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।
ऐसे में किशाऊ समझौता हरियाणा के लिए केवल एक नई परियोजना नहीं, बल्कि लंबित अंतरराज्यीय जल समझौतों को आगे बढ़ाने और भविष्य की पानी की जरूरत सुरक्षित करने की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
