'जनता पर महंगाई की नई मार', भूपेंद्र हुड्डा ने गिनाए UPI भुगतान पर फीस के नुकसान
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यूपीआई भुगतान पर लगने वाली फीस को महंगाई की नई चोट बताया ...और पढ़ें
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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा। फाइल फोटो
HighLights
यूपीआई भुगतान पर फीस से ग्राहक पर बढ़ेगा बोझ।
पेट्रोल-डीजल, ज्वैलर्स के शुल्क का दिया उदाहरण।
डिजिटल इंडिया पर टैक्स से रोजमर्रा की चीजें महंगी।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यूपीआइ भुगतान पर लगने वाली फीस आदमी पर महंगाई की नई चोट है। भाजपा सरकार जनता को गुमराह करने के लिए कह रही है कि इससे ग्राहक पर बोझ नहीं आएगा। सच्चाई ये है कि जब-जब मर्चेंट फीस लगती है तो उसका बोझ हमेशा ग्राहक पर ही पड़ता है।
उन्होंने उदाहरण दिया कि पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स और तमाम फीस का भुगतान कभी तेल कंपनियां नहीं करतीं। उनका भुगतान आखिरकार ग्राहकों को ही करना पड़ता है। इसलिए आम जनता को तेल पर 40 से 50 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है। इसी तरह पंप वाले कार्ड से भुगतान पर खुद शुल्क नहीं देते, उसे ‘फ्यूल सरचार्ज’ के नाम से ग्राहक से वसूल लेते हैं।
‘कन्वीनिएंस फीस’ कहकर लेते हैं यात्री से चार्ज
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्वैलर्स बैंकों को दिए जाने वाले डेढ़-दो प्रतिशत एमडीआर की भरपाई के लिए बिल में ‘कार्ड सरचार्ज’ जोड़ देते हैं। आइआरसीटीसी, सिनेमा हाल और ट्रेवल ऐप पेमेंट गेटवे का चार्ज ‘कन्वीनिएंस फीस’ कहकर यात्री से लेते हैं।
कई दुकानदार छोटे बिल पर कार्ड लेने से मना कर देते हैं ताकि प्रोसेसिंग खर्च बच जाए और ग्राहक को ज्यादा खरीदारी करने पर मजबूर होना पड़ता है। रेस्तरां और बड़े स्टोर एमडीआर सीधे बिल में जोड़ना गैर-कानूनी होने के बावजूद पांच प्रतिशत ‘सर्विस चार्ज’ लगाकर वही पैसा ग्राहक से निकाल लेते हैं।
छोटे व्यापारियों को एक लाख रुपये तक की छूट का दावा कागजी
भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि यही हाल यूपीआइ फीस का भी होगा। व्यापारी और बड़े मर्चेंट यह 0.4 प्रतिशत या अधिकतम 300 रुपये बिल में जोड़ देंगे। स्कूल-कालेज फीस, राशन, दवा, कपड़ा और रोजमर्रा की खरीद महंगी हो जाएगी। छोटे व्यापारियों को एक लाख रुपये तक की छूट का दावा कागजी है।
क्योंकि उनके पास जो सामान पीछे से आएगा, उसके रेट में पहले से ही यूपीआइ भुगतान की फीस जुड़ चुकी होगी। यानी वो सामान ग्राहकों को भी महंगा मिलेगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया का नारा देने वाली सरकार अब उसी व्यवस्था पर टैक्स लगा रही है, जिसे आम आदमी ने इसलिए अपनाया था कि वह मुफ्त है।
