जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा सहित दूसरे राज्यों में नकली कंपनियां बनाकर हजारों करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाला करने के तार Excise and taxation Department के अधिकारियों से जुड़ने लगे हैं। पूरे मामले की तहकीकात में जुटी हरियाणा विधानसभा की पब्लिक अकाउंट कमेटी (PAC) ने विभागीय स्तर पर चल रही जांच पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उच्च स्तर के अफसरों की मिलीभगत के बगैर इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं। साथ ही सवाल उठाया कि जब मामले में 92 एफआइआर दर्ज की गई हैं तो अभी तक एक भी अफसर के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यह सांठगांठ का बड़ा संकेत है।

Excise and taxation Department की ओर से अभी तक कराई गई जांच के मुताबिक डीलरों ने फर्जी फर्म बनाकर सरकार को करीब 400 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। इसके उलट PAC को आशंका है कि GST (वस्तु एवं सेवा कर) की चोरी से Excise and taxation Department को दो हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

यही वजह है कि विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट से असहमति जताते हुए PAC के मुखिया और विधानसभा में मुख्य सचेतक ज्ञानचंद गुप्ता ने महकमे को अगस्त के पहले सप्ताह तक संपूर्ण जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय में रिपोर्ट मिली तो PAC अपनी फाइनल रिपोर्ट हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में रख सकती है।

फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद महकमे ने करीब एक हजार करोड़ रुपये के बिलों को रोका हुआ है जो फर्जी फर्म के खातों में जाने वाले थे। हरियाणा के साथ ही दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश सहित दूसरे कई राज्यों के डीलरों ने सुनियोजित तरीके से घोटाले को अंजाम दिया। सबसे बड़ा घोटाला पानीपत में हुआ जहां दो हजार करोड़ से अधिक के फर्जी बिल बनाते हुए 166 करोड़ रुपये का फायदा भी उठा लिया।

GST फर्जीवाड़े के 175 मामलों में महकमे के भी कई कर्मचारियों व अफसरों की संलिप्तता मिली है। छोटे कर्मचारियों के खिलाफ तो विभागीय जांच और निलंबन की कार्रवाई की गई, लेकिन बड़े अफसरों के खिलाफ अभी तक कोई कड़ा एक्शन नहीं लिया गया है। हालांकि इस दौरान आरोपित डीलरों से करीब 18 करोड़ रुपये रिकवर किए जा चुके, जबकि 50 करोड़ रुपये ब्लॉक किए गए हैं।

डीलरों ने ऐसे किया गोलमाल

फर्जी फर्म बनाकर सामान की खरीद-फरोख्त दिखाते हुए बिल बनाए गए और फिर सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट का क्लेम कर दिया गया। सैकड़ों मामलों में GST की उच्च दर वाले सामान को बेचकर न्यूनतम GST की दर का बिल बना दिया गया जिससे सरकार को पूरा टैक्स नहीं मिला। इसी तरह दूसरे राज्यों में फर्जी फर्म बनाकर उसमें सेल दिखा दी गई, जबकि हकीकत में सामान की खरीद-फरोख्त हुई ही नहीं।

मिलीभगत बगैर इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं : गुप्ता

हरियाणा विधानसभा की पब्लिक अकाउंट कमेटी के चेयरमैन ज्ञानचंद गुप्ता का कहना हैै कि GST घोटाले में Excise and taxation Department को एक महीने के अंदर संपूर्ण जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। पंद्रह दिन बीत चुके, जबकि पंद्रह दिन बाकी हैं। PAC इस मामले में गंभीर है और अगर जांच का दायरा बढ़ाने की जरूरत हुई तो सरकार से इसकी सिफारिश की जाएगी। इतने बड़े स्तर का फर्जीवाड़ा विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर नहीं हो सकता। एक आदमी ने 18-18 फर्में अपने नाम से खोल लीं और विभागीय अफसर व कर्मचारी इसे लंबे समय तक पकड़ नहीं पाए, यह हजम होने वाली बात नहीं। मामले की तह तक जाकर रहेंगे।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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