चंडीगढ़, जेएनएन। हरियाणा में अगले तीन वर्षों में 40 फीसद बिजली धूप और पानी पर आधारित परियोजनाओं से मिलेगी। इससे न केवल कोयले की खपत में कमी आएगी, बल्कि लो वोल्टेज की समस्या से भी निजात मिलेगी। वर्ष 2021-22 तक अक्षय एवं नवीकरणीय तथा जल परियोजनाओं (हाइड्रो पावर) पर आधारित अधिकतर परियोजनाओं के समझौते सिरे चढऩे की उम्मीद है।

2200 मेगावाट अक्षय एवं नवीकरणीय ऊर्जा खरीद का अनुबंध, 120 मेगावाट के समझौते अंतिम चरण में

हरियाणा की बिजली वितरण कंपनियों ने पिछले तीन वर्षों में 2200 मेगावाट के अक्षय एवं नवीकरणीय ऊर्जा  खरीद के अनुबंध किए हैं। इसमें से 1120 मेगावाट बिजली के खरीद अनुबंध अंतिम चरण में हैं। प्रदेश में फिलहाल 12 हजार 350 मेगावाट बिजली उपलब्ध है। वर्ष 2015 तक राज्य में अक्षय एवं नवीकरणीय उर्जा की उपलब्धता केवल 234.4 मेगावाट थी, जबकि मौजूदा समय में बिजली निगमों के पास नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता 500 मेगावॉट है। अगले दो साल में यह 3600 मेगावॉट पहुंच जाएगी।

बिजली निगमों ने 1190 मेगावाट पवन ऊर्जा, 31.77 मेगावाट बिजली वेस्ट टू एनर्जी (कचरे से बनाई जाने वाली),  66.2 मेगावाट बिजली बायोमास परियोजनाओं से और लगभग 2000 मेगावाट सौर ऊर्जा से पैदा की जाने वाली बिजली के खरीद अनुबंध (पावर प्रचेज एग्रीमेंट) किए हैं।

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केंद्रीय बिजली मंत्रालय के निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार राज्य को वर्ष 2021-22 तक कुल बिजली खपत का 10.5 फीसद हिस्सा सौर ऊर्जा एवं 10.5 उर्जा अक्षय एवं नवीकरणीय स्रोतों से हासिल करनी है। इसके विपरीत प्रदेश अक्षय एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में लक्ष्य से भी दो फीसद अधिक अर्थात 23 फीसद उपलब्धि हासिल कर लेगा।

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वर्ष 2017 में किए गए पवन ऊर्जा के अनुबंध में से 100 मेगावाट बिजली की सप्लाई विगत मार्च में शुरू हो चुकी है। दिसंबर तक 500 मेगावाट और अगली जुलाई तक 590 मेगावाट पवन ऊर्जा और मिलनी शुरू हो जाएगी। सौर ऊर्जा के तहत अगले वर्ष 500 मेगावाट और अप्रैल 2021 में 440 मेगावाट व दिसंबर 2021 में 300 मेगावाट सौर उर्जा सप्लाई सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। 2021-22 में एनटीपीसी व एचपीजीसीएल से 793 मेगावाट सौर ऊर्जा बिजली की सप्लाई अनुमानित है। इसी तरह 31.77 मेगावाट बिजली कचरे और 66.2 मेगावाट बिजली बायोमास से बनेगी।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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