जासं, पंचकूला : खाद्य पदार्थो की गुणवता सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग की ट्रेनिग के बाद सर्टिफिकेट दिए जाने की योजना सराहनीय है। इसका व्यापारियों के साथ-साथ हर जनमानस को सीधा फायदा होगा। वहीं, गुणवतायुक्त खाद्य पदार्थ बेचना व्यापारियों की नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है। हालांकि ज्यादातर व्यापारी शुद्ध और स्वच्छ खाना परोस रहे हैं, पर कुछ लोगों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नहीं हैं। ऐसे व्यापारियों का बहिष्कार होना चाहिए। यह बात ट्रेनर प्रदीप कुमार ने मोरनी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित ट्रेनिग और सर्टिफिकेट वितरण समारोह में व्यापारियों की उमड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए कही। प्रदीप कुमार ने कहा कि ट्रेनिग और रजिस्ट्रेशन के लिए उमड़ रही व्यापारियों की भीड़ यह साबित करती है कि उन्हें लोगों के स्वास्थ्य की चिता है और वे हाइजेनिक फूड को लेकर गंभीर हैं। प्रशिक्षण में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अनुसार खाद्य एवं पेय पदार्थों बनाने की प्रक्रिया/विक्रय और उसकी बेहतर गुणवता एवं आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए मानक स्तर के खाद्य एवं पेय पदार्थ का उत्पादन किया जा सके, विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खास यह है कि इस दौरान लोगों से सुझाव, शिकायत लेकर जिज्ञासा का भी समाधान किया जा रहा है। ट्रेनर प्रदीप कुमार ने बताया कि एफएसएसएआइ के निर्देश पर हर लाइसेंसधारी खाद्य एवं पेय पदार्थ निर्माता और बिना लाइसेंसधारी खाद्य निर्माताओं/विकेताओं एवं सभी खाद्य पदार्थ विक्रताओं को यह प्रशिक्षण लेना जरूरी है। प्रशिक्षण में बताई जाएंगी बारीकियां

गैरलाइसेंसधारी व हर लाइसेंसधारी होटल, रेस्टोरेंट एवं बार संचालक भी प्रशिक्षण में शामिल होंगे। खाद्य पदार्थ विक्रेताओं की संख्या लगातार बढ़ने में खान-पान में असुरक्षिता भी बन रही है, जिसमें किराना व्यवसायी से लेकर पकोड़े बेचने वाले, फ्रूट्स बेचने वाले, बड़े हॉटेल्स भी शामिल हैं, लेकिन अब यह मनमाने ढंग से खाद्य पदार्थ नहीं बेच सकेंगे, बल्कि इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण लेना पड़ेगा। कारोबारी को रजिस्ट्रेशन कराकर तीन माह के अंदर हर कारोबारी को ट्रेनिग लेनी होगी, जिसके पास यह सर्टिफिकेट नहीं होगा, वह कारोबार नहीं कर सकेगा और सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।

Posted By: Jagran

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