चंडीगढ़, [बिजेंद्र बंसल]। चौटाला परिवार से पलवल के कांग्रेस विधायक करण सिंह दलाल की राजनीतिक रंजिश काफी पुरानी है। दलाल एक समय चौटाला पारिवार के काफी करीबी थी और बाद में यह प्‍यार तकरार में बदल गया। दलाल 1991,1996 में चौधरी बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी (हविपा) की टिकट पर पलवल से चुनाव जीते थे। वर्ष 1999 में दलाल ने भाजपा के रामबिलास शर्मा के साथ मिलकर चौधरी बंसीलाल की सरकार गिराने और आेमप्रकाश चौटाला को मुख्‍यमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।

 बंसीलाल की सरकार गिराकर ओमप्रकाश चौटाला को सीएम बनवाने में दलाल ने निभाई थी अहम भूमिका

हालांकि ओमप्रकाश चौटाला ने बाद में बंसीलाल की सरकार गिराने वाले अधिकतर हविपा विधायकों को किनारे लगा दिया। इस पर चौधरी बंसीलाल ने भी ओमप्रकाश चौटाला को बधाई प्रेषित की थी। इसके बाद करण दलाल चौटाला का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। 2000 के चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला का भाजपा के साथ समझौता हो गया और करण दलाल के भाजपा में जाने के  बावजूद चौटाला ने पलवल की सीट इनेलो के खाते में रख ली।

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इस चुनाव में दलाल का टिकट आेमप्रकाश चौटाला के दबाव में भाजपा ने काट दिया। इस पर दलाल आरपीआइ की टिकट पर चुनाव लड़े और उनके खिलाफ देवेंंद्र सिंह चौहान गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी बने। दलाल यह चुनाव जीत गए  और इसके साथ ही दलाल की चौटाला परिवार से रंजिश शुरू हो गई।

इसके बाद दलाल और चौटाला परिवार के बीच ऐसी तलवारें खिंचीं कि दोनों ने अब तक एक-दूसरे पर कोई वार करने में चूक नहीं की। वर्ष 2000 के चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला ने बहुमत से सरकार बनाई और दलाल पर शिकंजा भी कसा। दलाल परिवार पर एक हत्या सहित कुछ केस भी दर्ज हुए। हालांकि दलाल इनसे बाहर निकल अए मगर उनके लिए वह बहुत बुरा था।

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अपने शासनकाल के दौरान ओमप्रकाश चौटाला ने पलवल में अपनी पार्टी के हारे हुए नेता देवेंद्र सिंह चौहान को विधायक दलाल के सामने मंत्रियों से भी ज्यादा महत्व दिया। टिकट कटवाने से लेकर हत्या का केस दर्ज किए जाने पर दलाल ने ओमप्रकाश चौटाला के शासनकाल पर एक चार्जशीट तैयार की। इस दौरान वह कांग्रेस के नजदीक आ गए। पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल भी उनके साथ खड़े हो गए। हालांकि बंसीलाल की पार्टी में रहते हुए दलाल ने तब भजनलाल के खिलाफ भी दक्षिण हरियाणा में मोर्चा खोल रखा था।

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दलाल की चार्जशीट को कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद काफी महत्व दिया, क्योंकि वे 2004 में कांग्रेस विधायक के रूप में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा के काफी नजदीक आ गए थे। दलाल दावा करते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला सहित उनके बड़े पुत्र अजय सिंह चौटाला व मौजूदा नेता प्रतिपक्ष अभय सिंह चौटाला के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के उन्होंने पुख्ता सुबूत एकत्र किए थे।

राजनीति के दौर में हालांकि दोस्ती-दुश्मनी कभी स्थायी नहीं रहती, मगर दलाल और चौटाला परिवार की रंजिश में कभी कमी नहीं आई। इनके बीच तल्खी दिनों-दिन बढ़ती ही रही। दलाल पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा के समधी भी हैं। दलाल के पुत्र का विवाह हुडडा की भतीजी से हुआ है।

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Posted By: Sunil Kumar Jha