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पिता का साया नहीं रहा, मां ने दूसरी शादी की, पेंशन को भटकता मासूम बच्चा; हरियाणा के सोनीपत का मामला

By Ravi Atwal Edited By: Sohan Lal
Published: Fri, 30 Oct 2026 07:00 AM (IST)

एक 15 वर्षीय बच्चे को कैट चंडीगढ़ से बड़ी राहत मिली है, जिसने अपने दिवंगत पोस्टमैन पिता की पारिवारिक पेंशन ...और पढ़ें

चंडीगढ़ स्थित सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल का फैसला। (सांकेतिक फोटो)

चंडीगढ़ स्थित सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल का फैसला। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. 15 वर्षीय बच्चे को कैट चंडीगढ़ से मिली बड़ी राहत।

  2. दिवंगत पोस्टमैन पिता की पारिवारिक पेंशन का मामला।

  3. डाक विभाग को दो माह में फैसला लेने का निर्देश।

रवि अटवाल, चंडीगढ़। सिर से पिता का साया उठ जाना, फिर मां का दूसरी शादी कर छोड़ जाना, जिंदगी की ऐसी मुश्किलों से जूझ रहे हरियाणा के साेनीपत निवासी 15 साल के एक बच्चे ने चंडीगढ़ स्थित सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) का दरवाजा खटखटाया है।

बच्चे के पिता पोस्टमैन थे और उनकी मौत के बाद बच्चे ने फैमिली पेंशन उसे दिए जाने की मांग की है। अभी बच्चा अपने नाना-नानी के साथ रह रहा है जो खुद काफी बुजुर्ग हो चुके हैं। वह अब उसकी देखभाल करने और पढ़ाई का खर्चा उठाने में असमर्थ हैं।

कैट ने बच्चे की याचिका को मंजूर करते हुए उसे चार सप्ताह में जरूरी दस्तावेज जमा कराने के लिए कहा है। इसके साथ ही डाक विभाग को दो महीने के भीतर नियमों के अनुसार पेंशन के दावे पर फैसला करने के निर्देश दिए हैं।

बच्चे के पिता डाक विभाग में पोस्टमैन थे। 22 अगस्त 2010 को उनकी मौत हो गई। जिसके बाद पत्नी की पेंशन लग गई। वर्ष 2014 में मां ने भी दूसरी शादी कर ली, जिसके बाद फैमिली पेंशन बंद हो गई।

इसके बाद परिवार ने बेटे के नाम पर पारिवारिक पेंशन जारी करने की गुहार लगाई। वहीं, मां ने भी विभाग को पत्र लिखकर बेटे को पेंशन देने का अनुरोध किया, क्योंकि वह अपने नाना-नानी के पास रह रहा है।

मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है बच्चा

बच्चे ने याचिका में कहा कि उसके परिवार की ओर से नवंबर 2014 से लेकर फरवरी 2025 तक कई बार पेंशन के लिए आवेदन किया गया, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाया। वह दसवीं कक्षा में पढ़ रहा है और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग ले रहा है।

आर्थिक तंगी के कारण उसके लिए पढ़ाई जारी रखना बेहद मुश्किल हो चुका है। वहीं, डाक विभाग ने याचिका पर जवाब दायर कर कहा कि एक तो पेंशन के लिए करीब एक दशक बाद दावा किया जा रहा है, जिसकी कोई वजह नहीं बताई गई।

इसके अलावा सोनीपत डिवीजन के सुपरिंटेंडेंट ऑफ पोस्ट ऑफिस ने लेटर भेजकर पेंशन के संबंध में कुछ जानकारी मांगी थी, लेकिन परिवार की ओर से कोई जानकारी मुहैया नहीं करवाई गई।