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13 हजार सफाईकर्मी और 36 दिनों की लंबी हड़ताल... आखिर निकला बीच का रास्ता, न हरियाणा सरकार हारी और ना ही हड़ताली झुके

Published: Sun, 13 Sep 2026 05:37 AM (IST)

हरियाणा के 13 हजार सफाई कर्मचारियों की 36 दिन लंबी हड़ताल सात दौर की वार्ताओं के बाद समाप्त हो गई ...और पढ़ें

बैठक की अध्यक्षता करते सीएम नायब सैनी। फोटो सीएम एक्स

बैठक की अध्यक्षता करते सीएम नायब सैनी। फोटो सीएम एक्स

HighLights

  1. 36 दिन लंबी हरियाणा सफाई कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त हुई।

  2. नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और भत्तों पर समझौता हुआ।

  3. निलंबित कर्मचारियों की बहाली और सेवा में वापसी पर सहमति।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के करीब 13 हजार सफाई कर्मचारियों की 36 दिन लंबी हड़ताल का पटाक्षेप आखिरकार उस रास्ते पर हुआ, जिसमें न सरकार के पीछे हटने का संदेश गया और न कर्मचारियों को अपनी लड़ाई अधूरी छोड़ने का अहसास हुआ। छह अगस्त से चली हड़ताल सात दौर की वार्ताओं के बाद शुक्रवार को खत्म हुई।

अंतिम दौर की बातचीत में शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल और सामाजिक न्याय मंत्री कृष्ण बेदी ने कर्मचारी संगठनों को भरोसे में लेकर समाधान का रास्ता निकाला, जिसका पूरे प्रदेश को सफाई व्यवस्था फिर से बहाल होने के रूप में फायदा मिला।

दरअसल, हड़ताल के बाद टकराव जितना लंबा खिंचा, उतना ही दोनों पक्षों पर दबाव बढ़ता गया। हड़ताल से शहरी निकायों की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के कारण आम लोगों की परेशानी सरकार के लिए लगातार चिंता का विषय थी।

दूसरी तरफ कर्मचारियों के सामने भी जनता के विरोध, प्रशासनिक कार्रवाई, निलंबन और बर्खास्तगी जैसी परिस्थितियों के चलते हड़ताल खत्म करने का दबाव था। ऐसे में अंतिम वार्ता में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी कठोर स्थिति से थोड़ा पीछे हटकर ऐसा रास्ता चुना, जिसमें तत्काल टकराव समाप्त हो और आगे की मांगों के लिए संस्थागत प्रक्रिया बनी रहे।

15 दिन में जारी किया जाएगा विज्ञापन

हड़ताल की सबसे बड़ी मांग कर्मचारियों का नियमितीकरण थी। अंतिम समझौते में सरकार ने सीवरमैन और सफाई कर्मचारियों के खाली पदों पर भर्ती की समयबद्ध प्रक्रिया तय करने पर सहमति दी। प्रक्रिया निर्धारित होने के बाद एक महीने में चयन के मापदंड तय होंगे और इसके अगले 15 दिन में विज्ञापन जारी किया जाएगा।

महत्वपूर्ण बात यह है कि मापदंड तय करने वाली समिति में कर्मचारी संघ का प्रतिनिधि भी शामिल होगा। यही बिंदु इस समझौते का सबसे अहम राजनीतिक संतुलन है। विपुल गोयल और कृष्ण बेदी ने सातवें दौर की बातचीत के बाद जिस तरह से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ कर्मचारी नेताओं की वार्ता करवाकर इस हड़ताल को विराम दिलाया, वह सरकार व कर्मचारी नेताओं के साथ आम जनता के लिए राहत भरा संदेश था।

सरकार और कर्मचारी संगठनों के पास कालर खड़े करने की वजह मौजूद

हरियाणा सरकार ने भर्ती को नियम और प्रक्रिया के दायरे में रखते हुए अपनी प्रशासनिक स्थिति बरकरार रखी, जबकि कर्मचारी संगठन यह संदेश लेकर जाने में सफल रहे कि उनकी सबसे प्रमुख मांग को बातचीत की मेज पर पूरा करा लिया गया है।

इसके साथ कर्मचारियों के लिए कई ठोस फैसले हुए हैं। वर्दी भत्ता एकमुश्त देने की बजाय 440 रुपये प्रतिमाह करने पर सहमति बनी। पालिका रोल के सीवरमैन के वेतन में 2,100 रुपये मासिक बढ़ोतरी, 2,000 रुपये जोखिम भत्ता, साल में 20 मेडिकल अवकाश और नियमित कर्मचारियों को जोखिम भत्ता देने पर सहमति इस वार्ता के मुख्य बिंदु हैं।

निलंबन-बर्खास्तगी से वापसी ने बनाई समझौते की जमीन

इस समझौते का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू कर्मचारी संगठनों से जुड़ा है। नियमित कर्मचारियों का निलंबन बहाल करने तथा सेवा समाप्त किए गए पालिका रोल और एचकेआरएनएल कर्मचारियों को पुन: सेवा में लेने पर सहमति बनी है।

सरकार ने हड़ताल को दबाव की भाषा में खत्म कराने की बजाय कर्मचारियों को सम्मानजनक वापसी का रास्ता दिया, जबकि कर्मचारी नेताओं ने टकराव को लंबा खींचने की बजाय वार्ता से मिले ठोस फैसलों को स्वीकार किया।

यही वजह है कि इसे किसी पक्ष की हार या जीत से अधिक ‘दोनों तरफ से एडजस्ट करने वाला समझौता’ माना जा सकता है।