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अचानक बदला मौसम और दोपहर में छा गया अंधेरा, आसमान से बरसी 'आफत'; पलवल में धान किसानों की धड़कनें तेज

Published: Thu, 15 Oct 2026 02:23 PM (IST)

पलवल में अचानक मौसम बदलने से दोपहर में ही अंधेरा छा गया और तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। इससे ...और पढ़ें

पलवल में दिन में छाया अंधेरा। जागरण

पलवल में दिन में छाया अंधेरा। जागरण

HighLights

  1. पलवल में दोपहर में अचानक अंधेरा, तेज बारिश हुई।

  2. धान किसानों की फसल भीगने से नुकसान का खतरा।

  3. मंडियों में धान खरीद सुस्त, किसानों की चिंता बढ़ी।

जागरण संवाददाता, पलवल। मौसम ने ऐसी पलटी मारी कि दोपहर में ही दिन ने रात की चादर ओढ़ ली। आसमान में छाई काली घटाओं ने अंधेरा ऐसा गहराया कि वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। तेज हवाओं के साथ बरसी बूंदों ने एक बार फिर किसानों की धड़कनें बढ़ा दीं।

महीनों पसीना बहाकर धान की फसल तैयार करने वाले किसानों के लिए आसमान से बरसती बूंदें राहत नहीं, बल्कि आफत का पैगाम लेकर आई हैं। पहले ही खरीद व्यवस्था की सुस्ती से परेशान किसानों पर अब मौसम की मार पड़ने का खतरा मंडरा रहा है। सवाल यह है कि आखिर किसान अपनी मेहनत की फसल को कब तक मौसम की बेरुखी और व्यवस्था की ढिलाई से बचाता रहेगा?

काली घटाओं ने दिन में ही कर दिया अंधेरा

दोपहर के समय अचानक मौसम बदला और आसमान में घने काले बादल छा गए। देखते ही देखते अंधेरा गहराने लगा और तेज हवाओं के बीच वर्षा शुरू हो गई। दिन में ही रात जैसा नजारा बनने से सड़कों पर चल रहे वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर सफर करना पड़ा। अचानक बदले मौसम ने लोगों को हैरान कर दिया।

किसानों की मेहनत पर फिर मंडराया संकट

धान की फसल तैयार होने के समय मौसम की बेरुखी किसानों की परेशानी बढ़ा रही है। खेतों में खड़ी फसल के साथ मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ी धान की ढेरियों और बोरियों के भीगने का खतरा बढ़ गया है। धान में नमी बढ़ने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे किसानों को उपज बेचने में परेशानी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

मौसम और व्यवस्था के बीच पिस रहा किसान

किसान के सामने संकट दोहरा है। एक ओर मौसम का बदलता मिजाज फसल को नुकसान पहुंचाने की आशंका पैदा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मंडियों में खरीद और उठान में देरी उसकी मुश्किलें बढ़ा सकती है।

ऐसे में किसानों को फसल बचाने के लिए मौसम साफ होने का इंतजार है। अब देखना यह है कि मौसम कब राहत देता है और मंडियों में धान को भीगने से बचाने के लिए संबंधित एजेंसियां कितनी तत्परता दिखाती हैं।