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एफओबी निर्माण में चूक पड़ी भारी, सीढ़ियों के लिए अक्टूबर में बंद होंगे पलवल स्टेशन के प्लेटफार्म 7-8

Published: Thu, 25 Jun 2026 02:21 AM (IST)

पलवल रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत बन रहे फुट ओवर ब्रिज की सीढ़ियां तकनीकी खामियों के कारण ...और पढ़ें

फुट ओवर ब्रिज की सीढ़ियां न बनने के कारण 7 व 8 प्लेटफार्म का किया जाएगा चौड़ीकरण। जागरण

फुट ओवर ब्रिज की सीढ़ियां न बनने के कारण 7 व 8 प्लेटफार्म का किया जाएगा चौड़ीकरण। जागरण

HighLights

  1. पलवल स्टेशन पर एफओबी सीढ़ियां बनाने में तकनीकी चूक।

  2. प्लेटफार्म 7-8 अक्टूबर में चौड़ीकरण के लिए होगा बंद।

  3. यात्रियों को असुविधा, ट्रेनों में देरी की आशंका।

अशोक कुमार यादव, पलवल। रेलवे विभाग की लचर कार्यप्रणाली और अनियोजित विकास कार्यों का खमियाजा एक बार फिर आम जनता और यात्रियों को भुगतना पड़ेगा। दिल्ली-एनसीआर का एक प्रमुख स्टेशन माना जाने वाला पलवल रेलवे स्टेशन इस समय अधिकारियों की अदूरदर्शिता और बिना योजना के किए जा रहे निर्माण कार्यों की भेंट चढ़ रहा है।

करोड़ों रुपये के बजट से स्टेशन को आधुनिक रूप देने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। योजनाबद्ध तरीके से काम न होने के कारण अब यात्रियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। दरअसल, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पलवल रेलवे स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। स्टेशन के 46 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे कायाकल्प में यह एफओबी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्यों में लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण प्लेटफार्म नंबर सात-आठ पर देखने को मिल रहा है। यहां नया फुट ओवर ब्रिज तैयार किया जा रहा है, लेकिन अब तकनीकी खामियों और जगह की कमी के चलते इस ब्रिज की सीढ़ियां नहीं बन पाएंगी।

सही आकलन नहीं करने से अधर में लटका प्रोजेक्ट

अधिकारियों ने निर्माण शुरू करने से पहले प्लेटफार्म की चौड़ाई और तकनीकी पहलुओं का सही आकलन नहीं किया, जिसका नतीजा यह हुआ कि अब पूरा प्रोजेक्ट अधर में लटक गया है। फरीदाबाद रेलवे स्टेशन में कार्यरत आइओडब्ल्यू जुलफेद खान का कहना है कि ब्रिज की सीढ़ियां न बन पाने की समस्या का समाधान निकालने के लिए अब रेलवे ने एक नया रास्ता चुना है।

इसके तहत अब प्लेटफार्म नंबर सात और आठ को और अधिक चौड़ा किया जाएगा, ताकि सीढ़ियों के लिए जगह बनाई जा सके। इसके लिए इसी साल अक्टूबर महीने में प्लेटफार्म नंबर सात और आठ को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा और वहां ट्रैक, बिजली खंभे, सिग्नल शिफ्ट के साथ अन्य बड़े स्तर पर तोड़फोड़ तथा चौड़ीकरण का कार्य शुरू होगा।

लोकल यात्रियों पर टूटेगा बढ़ेगा ट्रेनों का दबाव

इस अनियोजित फैसले का सबसे गंभीर असर दैनिक रेल यात्रियों पर पड़ने वाला है। पलवल स्टेशन से दिल्ली, गाजियाबाद की तरफ जाने वाली ज्यादातर लोकल ट्रेनें प्लेटफार्म नंबर सात से ही बनकर चलती हैं। नौकरीपेशा और छात्रों के लिए यह प्लेटफार्म लाइफलाइन की तरह है।

प्लेटफार्म नंबर सात और आठ के बंद होने के बाद यहां से चलने वाली तमाम लोकल ट्रेनों को प्लेटफार्म नंबर एक, दो, तीन, चार, पांच और छह पर शिफ्ट किया जाएगा। पहले से ही व्यस्त रहने वाले इन छह प्लेटफार्मों पर अचानक ट्रेनों की संख्या बढ़ने से रेलवे के परिचालन तंत्र पर भारी दबाव बढ़ेगा।

ट्रेनों के समय में देरी होना लगभग तय माना जा रहा है। इसके साथ ही, ऐन वक्त पर प्लेटफार्म बदले जाने के कारण यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म की तरफ भागना पड़ेगा, जिससे स्टेशन पर भगदड़ जैसी स्थिति और हादसों का खतरा भी बढ़ जाएगा। यात्रियों ने मांग की है कि रेलवे प्रशासन को इस समस्या का कोई व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।

लाखों रुपये की लिफ्ट सफेद हाथी साबित हुई

रेलवे स्टेशन पर बुजुर्गों, दिव्यांगों और महिलाओं की सहूलियत के लिए लाखों रुपये की भारी-भरकम लागत से लिफ्ट लगाई गई थी। उद्देश्य था कि यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने में आसानी हो।

लेकिन देखरेख के अभाव और तकनीकी खामियों के चलते यह लिफ्ट इस समय पूरी तरह से बंद और बेकार पड़ी है। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी यात्रियों को भारी सामान उठाकर सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। रेलवे की इस लापरवाही से स्थानीय लोगों और दैनिक यात्रियों में भारी रोष है।

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तकनीकी कारणों से अभी निर्माणाधीन एफओबी से प्लेटफार्म नंबर सात व आठ को नहीं जोड़ा गया है। प्लेटफार्म की चौड़ाई कम है। इसे चौड़ा किया जाना है। पुराने एफओबी से अभी यात्री इस प्लेटफार्म पर आते हैं। प्लेटफार्म को चौड़ा करने के साथ ही नए एफओबी से सीढ़ी के माध्यम से जोड़ दिया जाएगा। प्लेटफार्म चौड़ा करने के काम शुरू होने पर इस प्लेटफार्म को बंद रखा जाएगा।

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हिमांशु शेखर उपाध्याय, उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी