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पलवल में 'मौत का कुआं': नाले में गिरा स्कूटी सवार, गिड़गिड़ाने पर बोली पुलिस- हमारा काम सिर्फ ट्रैफिक संभालना

Published: Wed, 14 Oct 2026 04:45 PM (IST)Updated: Wed, 14 Oct 2026 04:46 PM (IST)

पलवल के न्यू सोहना रोड पर एक स्कूटी सवार खुले नाले में जा गिरा, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। पुलिस ने मदद करने से इनकार कर दिया।

स्कूटी सवार की मदद से पुलिस का इनकार।

स्कूटी सवार की मदद से पुलिस का इनकार।

HighLights

  1. न्यू सोहना रोड पर स्कूटी सवार खुले नाले में गिरा।

  2. पुलिस ने मदद करने से इनकार कर संवेदनहीनता दिखाई।

  3. प्रशासन की लापरवाही से खुले नाले बने मौत का कारण।

अशोक यादव, पलवल। पलवल में प्रशासन की लापरवाही एक बार फिर एक बड़े हादसे का सबब बनते-बनते बची। न्यू सोहना रोड पर नागरिक अस्पताल के ठीक सामने बिना किसी सुरक्षा दीवार के खुले मौत के कुएंनुमा नाले में एक स्कूटी सवार जा गिरा।

गनीमत रही कि इस दुर्घटना में पीड़ित को केवल गंभीर चोटें आईं, वरना महज कुछ महीने पहले हथीन मोड़ पर हुए उस भयावह हादसे की पुनरावृत्ति हो सकती है, जिसमें एक युवक अपनी जान गंवा चुका था। हैरानी तब और बढ़ गई जब चंद कदमों की दूरी पर खड़े खाकी के पहरेदारों ने घायल की मदद करने से साफ इनकार कर दिया।

सड़क पर मौत का पहरा: बाल-बाल बचे राजेंद्र

हाउसिंग बोर्ड निवासी राजेंद्र कुमार नागरिक अस्पताल में सीटी स्कैन कराने के लिए निकले थे। न्यू सोहना रोड चौक पर लगे भारी जाम के बीच उनकी स्कूटी नाले के बिल्कुल किनारे से गुजर रही थी। तभी अचानक सामने से तेज गति से आई एक कार के चालक ने लापरवाही से वाहन मोड़ा।

उस वाहन की टक्कर से बचने के प्रयास में राजेंद्र का संतुलन बिगड़ गया और वे अपनी स्कूटी समेत सीधे गहरे, बिना बैरिकेड वाले नाले में जा समाए। इस हादसे में उनके घुटनों और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं।

संवेदनहीनता की हद: 'हम सिर्फ ट्रैफिक संभालते हैं'

राजेंद्र कुमार का आरोप है कि नाले में गिरने के बाद जब उन्होंने जान बचाने और वाहन निकलवाने के लिए चौक पर मुस्तैद पुलिसकर्मियों से गुहार लगाई, तो उनका जवाब बेहद निराशाजनक था। पुलिसकर्मियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उनकी ड्यूटी केवल यातायात व्यवस्था संभालने की है, किसी राहत कार्य की नहीं।

जब इस संबंध में मौके पर हालांकि, इस असंवेदनशील रवैये के बाद स्थानीय राहगीरों ने मसीहा बनकर खुद आगे आए और राजेंद्र और उनकी स्कूटी को नाले से बाहर निकाला।

प्रशासन की जवाबदेही पर बड़े सवाल: कब जागेगा प्रशासन?

यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले 23 जुलाई को हथीन मोड़ के पास एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर इसी प्रकार के खुले नाले में समा गई थी, जिसमें एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई थी। इतने बड़े हादसे के बाद भी स्थानीय प्रशासन की नींद नहीं टूटी है।

शहर के मुख्य मार्गों पर खुले नाले आज भी मौत बनकर मुंह बाए खड़े हैं। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? संबधित विभागों को तत्काल प्रभाव से ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान कर सुरक्षा दीवार (बाउंड्री वॉल), मजबूत बैरिकेड्स और चेतावनी संकेतक लगाने चाहिए, ताकि प्रशासनिक उदासीनता के कारण किसी और की जिंदगी दांव पर न लगे।