नई दिल्ली/पलवल, जागरण संवाददाता। दिल्ली से सटे हरियाणा पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पलवल पुल‍िस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलीजेंस) के लिए कथित रूप से जासूसी करने के मामले में एक पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपित की पहचान अम्बाला निवासी सुरेंद्र के रूप में की गई है। सुरेंद्र पहले भारतीय सेना में तैनात था। रिटायर के बाद पुलिस में शामिल हुआ था। आरोपित पुलिसकर्मी सुरेंद्र हरियाणा के अंबाला के वंदना एनक्लेव गांव बोह का रहने वाला है। यह व्यक्ति वाट्सएप के माध्यम से खुफिया सूचनाएं पाकिस्तान भेजता था। बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति किसी महिला मित्र के जाल में फंस गया और फिर लगातार गुप्त सूचनाएं लीक करने लगा। फेसबुक के माध्यम से यह महिला के संपर्क में आया था। आरोपित जिला पुलिस कार्यालय में गार्ड की ड्यूटी पर तैनात था। उसके पास से दो मोबाइल भी बरामद हुए हैं। एक्स सर्विस मेन कोटे से उसकी भर्ती हुई थी।

आगरा कैंट से सेना का लांस नायक गिरफ्तार

वहीं, इससे पहले पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के लिए जासूसी करने के आरोप में मंगलवार को गिरफ्तार किए गए रसद ठेकेदार हबीबुर्र रहमान के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बुधवार को आगरा कैंट में तैनात सेना के एक लांस नायक को भी गिरफ्तार कर लिया है। लांस नायक परमजीत सिंह पूर्वी उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। यह गिरफ्तारी पोखरण में सेना को रसद, दूध, मीट व सब्जियां आपूर्ति करने वाले ठेकेदार हबीबुर्र रहमान से पूछताछ के बाद की गई है। दोनों को तीस हजारी कोर्ट स्थित ड्यूटी मजिस्ट्रेट के पास पेशकर पूछताछ के लिए दस दिनों के रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अधिकारी का कहना है कि जासूसी मामले में इन दोनों से सेना के कई अधिकारियों व कर्मचारियों के जुड़े होने की जानकारी मिली है। जल्द ही तीन-चार अन्य सैन्यकर्मियों की भी गिरफ्तारी हो सकती है।

विशेष आयुक्त क्राइम ब्रांच प्रवीर रंजन ने बताया कि परमजीत के मोबाइल से भारतीय सेना से संबंधित बेहद संवेदनशील जानकारियां मिली हैं। दो साल पहले उसकी तैनाती जैसलमेर के पोखरण स्थित सेना के कैंप में रसद आपूर्ति विभाग में थी। उसके आर्डर पर ही बीकानेर निवासी हबीबुर्र रहमान सेना को रसद, दूध, मीट व सब्जियां आपूर्ति करता था। ऐसे में दोनों में जान पहचान हो गई। इसी दौरान हबीबुर्र रहमान ने परमजीत को सेना से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज मुहैया कराने के लिए राजी कर लिया था। इसके बाद परमजीत का तबादला जब आगरा कैंट में अतिसंवेदनशील एस्टेब्लिशमेंट विभाग में क्लर्क के तौर पर हुआ तब हबीबुर्र के लिए वह बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गया। इसके बाद से देश की सुरक्षा व सेना से जुड़े अतिसंवेदनशील गोपनीय दस्तावेज आसानी से मिलने लगे। इन्हें उसने सीधे आइएसआइ अथवा हैंडलरों व पाकिस्तान से जुड़े अन्य जासूसों को बेचना शुरू कर दिया।

वाट्सएप व टेलीग्राम के जरिये मुहैया कराता था दस्तावेज

जांच से पता चला कि हबीबुर्र को परमजीत वाट्सएप व टेलीग्राम के जरिये दस्तावेज मुहैया करता था। दस्तावेज को हबीबुर्र आगे आइएसआइ व हैंडलरों को भेज देता था। जांच में पता चला है कि हबीबुर्र की बुआ पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रहती हैं। वह कुछ साल पहले बुआ के पास गया हुआ था। वहां कमल और मतीम दो हैंडलरों से उसकी मुलाकात हुई थी। उन्होंने हबीबुर्र रहमान से भारत में सेना से जुड़े दस्तावेज मुहैया कराने के लिए कहा था। इसके बदले उन्होंने मोटी रकम देने का प्रलोभन भी दिया था।

हवाला के जरिये पाकिस्तान से आता था पैसा

संवदेनशील दस्तावेज मुहैया कराने के लिए हबीबुर्र रहमान परमजीत को मोटी रकम देता था। रकम के बारे में सही जानकारी अभी पुलिस को नहीं मिल पाई है। बताया जा रहा ह कि जासूसी करने के एवज में पाकिस्तान से हवाला के जरिये हबीबुर्र को पैसा आता था।

Edited By: Jp Yadav