चंद्रप्रकाश गर्ग, होडल

प्रशासन की लापरवाही के चलते नगरपालिका प्रशासन द्वारा वर्षों पहले गढ़ी रोड पर बनाई गई मीट मार्केट खंडहर में तब्दील होकर रह गई है। पालिका द्वारा लाखों रुपये की लागत से तैयार कराई गई मार्केट में अब झाड़ियां उग चुकी है और ग्रामीणों द्वारा उक्त स्थान को शौचालय के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

मार्केट में बनी दुकानों में एक भी मीट की दुकान स्थापित नहीं की जा सकी। जबकि मीट विक्रेता हैं कि शहर के बीच बने बाजार में धड़ल्ले के साथ अवैध रूप से मीट बेचने के कार्य में लगे हुए हैं। इतना ही नहीं खटीकवाडा, कच्चा तालाब, नंगला रोड, गढ़ी रोड, सब्जीमंडी के अलावा अन्य कई स्थानों पर मीट की धड़ल्ले से दुकानें चलाई जा रही हैं। बाजार में अवैध रूप से मीट की बिक्री करने वाले दुकानदारों पर किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं हैं और प्रशासन है कि सब कुछ देखते हुए भी अनजान बना हुआ है।

शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं बाजार के व्यापारियों के विरोध के बाद पालिका प्रशासन द्वारा लगभग 10 साल पहले शहर के बाजार में खुली मीट की दुकानों को यहां से हटाकर गढ़ी रोड पर स्थापित करने की योजना बनाई थी, जिसके लिए 6 लाख रुपये की लागत से आधा दर्जन मीट की दुकानें व एक बूचड़खाने का निर्माण कराया था। प्रशासन द्वारा उक्त दुकानों को मीट बिक्री की दुकानें खोलने के लिए बोली भी छोड़ी गई थी, लेकिन किसी भी दुकानदार ने उक्त बाजार में मीट की दुकान चलाना मुनासिब नहीं समझा।

शहर में अवैध रूप से चल रही मीट की दुकानों से नागरिकों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। मीट विक्रेताओं पर पालिका प्रशासन द्वारा किराये पर दी गई दुकानों का हजारों रुपये भी बकाया चल रहा है। शहर में विभिन्न कॉलोनियों में आधा दर्जन से अधिक अवैध मीट बिक्री की दुकानें चलाई जा रही हैं, लेकिन परिषद के रिकॉर्ड में शहर के किसी भी बाजार में मीट की कोई भी दुकान नहीं चल रही है। शहर में खुली मीट की सभी दुकानों को शीघ्र ही बंद कराया जाएगा। गढ़ी रोड स्थित मीट मार्केट में दुकानें किराये पर उठाई हुई हैं और जिन दुकानदारों पर किराया बकाया चल रहा है, उन्हें नोटिस जारी करके एक सप्ताह में किराया जमा कराने के आदेश दिए जाएंगे।

-राजगोपाल, चेयरमैन नप

Posted By: Jagran

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