सुनील शर्मा, तावडू

जिले को टीबी (तपेदिक) मुक्त करने के जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों की तावडू पीएचसी ने पोल खोलकर रख दी है। नूंह जिले में इस वर्ष अब तक 3068 मरीज टीबी पॉजिटिव पाए जा चुके हैं, जिनमें से 2556 सरकारी व 512 प्राइवेट अस्पतालों के मरीज हैं। वहीं वर्ष 2018 में जिले में 3059 मरीज टीबी पॉजिटिव थे, जिनमें 2369 सरकारी व 690 प्राइवेट अस्पतालों के मरीज थे। ज्यादातर प्राइवेट अस्पतालों का आंकड़ा विभाग के पास मौजूद नहीं है।

तावडू में वर्ष 2015-16 में 133 लोगों को टीबी की पुष्टि हुई। लैब जांच में 110 के बलगम नमूने पॉजिटिव मिले व 23 अन्य व्यक्तियों को शरीर के अन्य अंगों में टीबी मिली। जबकि 2016-17 में जांच के दौरान 238 मरीजों को टीबी की पुष्टि हुई। लैब जांच में लगभग 116 के बलगम नमूने पॉजिटिव मिले व बाकी 122 के शरीर के अन्य अंगों में टीबी मिली। वर्ष 2018 में 287 मरीज टीबी पॉजिटिव मिले थे। वर्ष 2019 की बात करें तो अब तक पीएचसी तावडू में अब तक 295 लोगों को जांच के दौरान टीबी पॉजिटिव मिली है। इनमें से लगभग 60 मरीज ऐसे हैं, जिनके शरीर के अन्य अंगों में टीबी मिली है। इन मरीजों का इलाज जारी है। जिन मरीजों को टीबी का संक्रमण बहुत अधिक होता है उनका एमडीआर (मल्टी ड्रग रेस्सिटेंस) टेस्ट नलहड़ मेडिकल कॉलेज नूंह में होता है। पूरी दवाई न लेना बनता है मौत का कारण:

जिन मरीजों के बलगम नमूने पॉजिटिव मिलते हैं उन्हें डॉट्स (डायरेक्ट ऑब्जर्वड ट्रीटमेंट शॉर्ट) का 6-9 महीने का कोर्स दिया जाता है। इसके तहत मरीज को स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में टीबी की दवाई दी जाती है। शहर में अस्पताल में आकर ही दवाई लेनी पड़ती है जबकि गांव में आशा वर्कर मरीजों को समयबद्ध तरीके से दवाइयां खिलाती हैं। सीधे मरीजों को दवाइयां न देने के पीछे कारण दवा समय से लेने में उनकी लापरवाही है। ये लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ती है व उनकी जान चली जाती है। हर महीने न्यूट्रिशन के मिलते हैं 500 रुपये:

टीबी मरीज को न्यूट्रिशन (पोषण) को लेकर विभाग द्वारा हर महीने 500 रुपये दिए जाते हैं। चिकित्सकों की मानें तो टीबी में समुचित खान-पान बेहद जरूरी है। वहीं जो भी व्यक्ति टीबी जांच को लेकर अस्पताल तक मरीज को लेकर आता है व उस मरीज को टीबी की पुष्टि हो जाती है तो उस लाने वाले व्यक्ति को विभाग 500 रुपये प्रदान करता है। आंकड़ों को लेकर उड़ रही धज्जियां:

टीबी मरीज की जानकारी को लेकर प्राइवेट अस्पतालों को सरकार व विभाग के आदेश हैं कि प्राइवेट अस्पताल में आने वाले हर टीबी मरीज की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल निक्शय (एनआइकेएसएचएवाइ) पर तुरंत दी जाए। लेकिन अधिकांश प्राइवेट अस्पताल ये जानकारी पोर्टल पर नहीं दे रहे, जिससे सरकार व विभाग को टीबी मरीजों की संख्या का समुचित आंकड़ा नहीं मिल रहा है। इससे सरकार के टीबी फ्री मिशन में काफी बाधा उत्पन्न हो रही है। इसके पीछे प्राइवेट अस्पतालों का उद्देश्य टीबी मरीजों की जेब ढीला करना होता है। गलत मार्गदर्शन व समुचित रूप से दवा न लेने के चलते टीबी मरीज सही नहीं होते व इस स्थिति में एक टीबी मरीज एक वर्ष में 11-15 लोगों को टीबी से संक्रमित कर देता है। बच्चा पैदा होने के बाद बीसीजी का टीका लगता है जोकि अधिकांश बच्चों के परिजन लगवाते नहीं। ऐसे वो लोग हैं जो डिलीवरी सरकारी अस्पतालों में नहीं अपने घर करवाते हैं। अगर ये टीका लग जाए तो सहज रूप से टीबी नहीं होती। वहीं भीड़ व संकरी स्थानों पर ज्यादा रहना, धूम्रपान, डायबिटीज से भी टीबी का संक्रमण होता है। जिले में कुल 13 प्राइवेट अस्पताल ही विभाग द्वारा रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 5-6 अस्पताल टीबी मरीजों की डिटेल ऑनलाइन देते हैं। जो नहीं दे रहे उन पर जल्द विभाग कार्रवाई करेगा।

- डॉ. प्रवीनराज तंवर, जिला क्षयरोग अधिकारी, नूंह।

Posted By: Jagran

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