जागरण संवाददाता, तावडू:

ऑर्फन इन नीड बालगृह की विस्तृत रिपोर्ट राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भेजने को लेकर राज्य स्तरीय आयोग गंभीर रूप से विचार कर रहा है। इसके पीछे कारण है आयोग द्वारा बालगृह की विस्तृत रूप से जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद कार्रवाई में सरकार व प्रशासन द्वारा ढिलाई बरतना। अगर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को मामले की रिपोर्ट भेजी जाती है तो इसमें दोराय नहीं कि जल्द ही राष्ट्रीय स्तरीय आयोग की टीम बालगृह का दौरा करेगी। वहीं जांच में राष्ट्रीय आयोग ने भी राज्य स्तरीय आयोग की रिपोर्ट पर मुहर लगा दी तो सरकार व प्रशासन की काफी किरकरी हो सकती है।

हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन ज्योति बैंदा ने तावडू खंड के गांव घुसपैठी स्थित ऑर्फन इन नीड बालगृह का कुछ समय पूर्व औचक निरीक्षण किया था। जिसमें बालगृह में काफी अनियमितताएं पाई गई थी। आयोग ने रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। उसके बाद सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग की अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) डॉ. सरिता मलिक को दुबारा जांच के लिए भेजा। ये रिपोर्ट भी सरकार को प्रेषित हो गई। जांच के बाद सरकार ने नूंह प्रशासन से जांच कराने के बारे में आदेश जारी किए। उपायुक्त के आदेश पर तत्कालीन अतिरिक्त उपायुक्त प्रदीप दहिया ने स्वयं सहित 11 सदस्य कमेटी का गठन किया। इस कमेटी ने बालगृह की काफी देर तक जांच की। जांच के बाद एडीसी ने कहा था कि प्रथम ²ष्टया बालगृह का भौतिक मूलढांचा सही पाया है।

बालगृह पर ये हैं आरोप:

बच्चों का समुचित रिकॉर्ड नहीं, अन्य जिले के बच्चों को रखना, एक ही समुदाय के बच्चों को रखना, बच्चों की शिक्षा का समुचित प्रबंध नहीं, बच्चों के अभिभावकों से अनर्गल एफिडेविट लेना, बालगृह में तहखाना, बालगृह पर नाम तक अंकित न होना, बालगृह को मिलने वाली फं¨डग, बालगृह की वेबसाइट पर बीफ की डिमांड, बच्चों का समुचित मेडिकल चैकअप न होना।

जांच टीम पर उठते रहे हैं सवाल:

बाल आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सीडब्ल्यूसी को भंग करने व डीसीपीओ पर कार्रवाई की बात सरकार ने कही थी। वहीं सीडब्ल्यूसी की चेयरपर्सन पर भी गंभीर आरोप जड़े थे। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संदेह के घेरे में आने वाले अधिकारियों को जांच में शामिल करने पर आयोग ने कई बार सवाल उठाए हैं। आयोग के अलावा जो भी जांचें हुई हैं वो जांच टीमें बालगृह की खामियों को दुरुस्त करवा रही हैं। जो 12 खामियां बालगृह प्रबंधन ने लिखित रूप से आयोग को दी हैं उन पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई। अब इस मामले की रिपोर्ट राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भेजी जाएगी।

ज्योति बैंदा, चेयरपर्सन, हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग।

Posted By: Jagran