नूंह के किसानों की बल्ले-बल्ले: दिल्ली-NCR की मंडियों में धूम मचा रही अगेती हरी प्याज; मिल रहे बंपर दाम
नूंह जिले के किसान दिल्ली-एनसीआर की मंडियों में अपनी अगेती हरी प्याज बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। 40-50 रुपये ...और पढ़ें

प्याज की अगेती फसल किसानों के लिए मुनाफे का जरिया बन चुकी है। AI जनरेटेड
HighLights
नूंह के किसान हरी प्याज से कमा रहे अच्छा मुनाफा।
दिल्ली-एनसीआर मंडियों में मिल रहे 40-50 रुपये प्रति किलो।
7700 हेक्टेयर में हरी प्याज की खेती, किसान खुश।
संवाद सहयोगी, पिनगवां (मेवात)। नूंह जिले के किसानों की कड़ी मेहनत इन दिनों दिल्ली-एनसीआर की थोक व खुदरा मंडियों में खूब रंग ला रही है।
पिनगवां खंड के खानपुर घाटी, रहपुआ और झिमरावट समेत आसपास के कई गांवों में उगाई गई प्याज की अगेती फसल किसानों के लिए मुनाफे का जरिया बन चुकी है।
खेत में पूरी सूखी गांठ पकने का लंबा इंतजार करने के बजाय किसान अब इसे हरी पत्तियों समेत यानी आल वाली हरी प्याज के रूप में उखाड़कर सीधे दिल्ली और गुरुग्राम की मंडियों में पहुंचा रहे हैं, जहां उन्हें हाथों-हाथ बेहतरीन दाम मिल रहे हैं।
पौने दो एकड़ भूमि में प्याज की फसल
बता दें कि जिले में इस बार 7700 हेक्टेयर में हरी प्याज बोई गई है। जिसका किसानों का अच्छा भाव मिल रहा है। करीब एक दशक से प्याज की खेती करने वाले खानपुर घाटी गांव के किसान इनायत ने बताया कि उन्होंने इस बार करीब पौने दो एकड़ भूमि में प्याज की फसल लगाई हुई है।
वे सुबह-सवेरे खेत से हरी प्याज को पत्तियों सहित उखाड़कर उसकी धुलाई व छंटाई करते हैं और पिछले कई दिनों से सीधे पिकअप में भरकर दिल्ली एनसीआर की मंडियों में लेकर जा रहे हैं।
अधिक मुनाफा मिलने की उम्मीद
इनायत के अनुसार, मंडी में उनकी हरी पत्तियों वाली प्याज 40 से 50 रुपये प्रति किलो के थोक भाव में आसानी से बिक रही है। उन्होंने भाव को लेकर संतुष्टि जाहिर करते हुए कहा कि फसल की शुरुआत में ही अच्छे भाव मिलने से उनको बहुत बड़ी आर्थिक राहत मिली है। इससे खेती की लागत पहले ही निकल रही है और बाकी बची फसल से आने वाले दिनों में और अधिक मुनाफा मिलने की उम्मीद है।
जो प्याज अभी खेतों में खड़ी रह जाएगी, उसे किसान आगे चलकर सूखी गांठ बनाकर बाजार में उतारेंगे। मिली जानकारी के अनुसार राजधानी दिल्ली की आजादपुर, ओखला और गाजीपुर जैसी एनसीआर की बड़ी मंडियों में ताजी आल वाली प्याज की थोक दरें 40 से 50 रुपये प्रति किलो तक चल रही हैं, जबकि गुरुग्राम की मंडी में 35 से 45 रुपये प्रति किलो के बीच दाम बताए जा रहे हैं।
थोक से निकलकर जब यह प्याज दिल्ली-एनसीआर के रिहायशी इलाकों में ठेलों और रेहड़ी-पटरी वालों के पास पहुंच रही है, तो वहां आम उपभोक्ताओं को यह 60 से 70 रुपये प्रति किलो या 20 रुपये की छोटी गड्डी के हिसाब से बेची जा रही है। शादी-ब्याह के सीजन, होटलों और घरेलू रसोई में शुरुवाती ताजी हरी प्याज की भारी मांग के चलते भाव मजबूत बने हुए हैं।
किसानों के चेहरे खिल उठे
किसानों का कहना है कि सूखी प्याज तैयार होने में अभी काफी समय बाकी है और उस वक्त भाव गिरने की आशंका भी बनी रहती है। ऐसे में अगेती हरी प्याज को इस भाव पर बेचकर किसान तुरंत सीधी नकदी हासिल कर रहे हैं। समय पर बेहतर दाम मिलने से इलाके के किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और इससे क्षेत्र की किसान आर्थिक रूप से मजबूत भी हो रहे हैं।
जिले में इस बार 7700 हेक्टेयर भूमि में हरी प्याज की फसल किसानों द्वारा बोई गई है। अच्छा भाव मिलने से किसान काफी खुश हैं। इससे किसानों की आर्थिक स्थिती भी सुधरेगी। - अब्दुल रजाक, जिला बागवानी अधिकारी नूंह
