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हरियाणा: अक्टूबर में बाजरे की जगह मिलेगा गेहूं, सितंबर के बचे स्टॉक से खाद्य विभाग कराएगा राशन वितरण

Published: Wed, 14 Oct 2026 03:07 PM (IST)

हरियाणा खाद्य विभाग ने अक्टूबर 2026 में बाजरे की अनुपलब्धता पर गेहूं वितरित करने के निर्देश दिए हैं। सितंबर 2026 ...और पढ़ें

हरियाणा खाद्य विभाग के निर्देश (AI-Generated Image)

हरियाणा खाद्य विभाग के निर्देश (AI-Generated Image)

HighLights

  1. अक्टूबर 2026 में बाजरे की जगह गेहूं का वितरण होगा

  2. हरियाणा खाद्य विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी किए

  3. सितंबर के बचे गेहूं स्टॉक का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा

जागरण संवाददाता, नूंह। हरियाणा सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने अक्टूबर 2026 में राज्य हिस्से के तहत बाजरे की उपलब्धता नहीं होने पर उसके स्थान पर गेहूं वितरित करने के निर्देश जारी किए हैं।

विभाग के 12 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार, बाजरे की अनुपलब्धता की स्थिति में सितंबर 2026 के शेष गेहूं स्टाक से लाभार्थियों को गेहूं दिया जाएगा। इससे राशन वितरण व्यवस्था सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी।

विभाग की ओर से प्रदेश के सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अक्टूबर महीने में राज्य हिस्से के तहत वितरण के लिए बाजरा उपलब्ध नहीं होने पर गेहूं का वितरण सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए सितंबर महीने के बचे हुए गेहूं के स्टाक का उपयोग किया जाएगा।

डिपो पर पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश

विभाग ने सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक उचित मूल्य की दुकान (एफपीएस) पर पर्याप्त मात्रा में गेहूं उपलब्ध रखा जाए, ताकि पात्र लाभार्थियों को समय पर राशन मिल सके।

अगर किसी डिपो पर गेहूं की कमी होती है, तो जिले के ऐसे दूसरे डिपो से गेहूं मंगवाया जाएगा, जहां अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध है। गेहूं को एक डिपो से दूसरे डिपो तक पहुंचाने की व्यवस्था हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन संघ (कानफेड) के परिवहन माध्यम से की जाएगी।

विभाग ने कानफेड के प्रबंध निदेशक को भी आवश्यक परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि राशन वितरण में किसी प्रकार की रुकावट न आए। विभाग के इस फैसले का उद्देश्य राज्य हिस्से के तहत पात्र लाभार्थियों को समय पर राशन उपलब्ध कराना और उचित मूल्य की दुकानों पर खाद्यान्न की कमी से उत्पन्न होने वाली परेशानी को रोकना है।

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