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नूंह में आर्बिटल रेल कॉरिडोर टनल धंसी, 500 मीटर से अधिक जमीन समाई, गांव में दहशत

Published: Sun, 11 Oct 2026 02:56 PM (IST)

नूंह के पाटुका गांव में हरियाणा आर्बिटल रेल कॉरिडोर की निर्माणाधीन टनल में छह दिन में दूसरी बार बड़ा धंसाव हुआ।

नूंह में आर्बिटल रेल कॉरिडोर टनल धंसी  ( एआई जेनरेटेड इमेज )

नूंह में आर्बिटल रेल कॉरिडोर टनल धंसी ( एआई जेनरेटेड इमेज )

HighLights

  1. नूंह में आर्बिटल रेल कॉरिडोर टनल में दूसरा बड़ा धंसाव।

  2. 500 मीटर से अधिक जमीन धंसी, स्कूल और मकान क्षतिग्रस्त।

  3. गेल पाइपलाइन प्रभावित, रेलवे अधिकारी जांच में जुटे।

जागरण संवाददाता, नूंह। उपमंडल के गांव पाटुका में हरियाणा आर्बिटल रेल कॉरिडोर की निर्माणाधीन टनल में छह दिन के भीतर दूसरी बार बड़ा धंसाव होने से क्षेत्र में दहशत फैल गई।

शनिवार देर रात करीब नौ बजे हुए इस हादसे में तीन से चार एकड़ कृषि भूमि धंस गई और 500 मीटर से अधिक हिस्से में जमीन बैठ गई। हादसे में एक सरकारी स्कूल की इमारत का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि दो मकानों को नुकसान पहुंचा। इनमें से एक मकान पूरी तरह जमींदोज हो गया।

हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई

पहाड़ से गांव को जोड़ने वाला लेंटर का रास्ता भी बाधित हो गया, जबकि बिजली का एक बड़ा टावर भी झुक गया। गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।

जानकारी के अनुसार, शनिवार रात ग्रामीणों ने अचानक तेज आवाज सुनी। बाहर निकलकर देखा तो खेतों में बड़ा गड्ढा बन चुका था, जो लगातार बढ़ता गया। रात में करीब 300 मीटर तक जमीन धंस गई थी, जिसका

दायरा रविवार सुबह तक 500 मीटर से अधिक हो गया। निर्माणाधीन मकान पर शटरिंग लगी हुई थी, जो हादसे में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उस समय मकान में कोई मौजूद नहीं था।

विशेषज्ञों ने संभाला मोर्चा

धंसाव के कारण जामनगर से लोनी, गाजियाबाद तक जाने वाली गेल कंपनी की गैस पाइपलाइन भी मिट्टी से बाहर निकल आई। हालांकि, पाइपलाइन में गैस रिसाव नहीं हुआ। गेल कंपनी के करीब दो दर्जन अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर पाइपलाइन को सुरक्षित करने में जुट गई।

रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और जांच दल ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने घटनास्थल के आसपास निगरानी बढ़ा दी। मस्जिदों से ऐलान कराकर ग्रामीणों और बच्चों को घटनास्थल से दूर रहने की हिदायत दी गई।

कमजोर चट्टानों से रिसाव की आशंका

रेलवे के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नरेंद्र छिब्बर ने बताया कि धंसाव के कारणों की समीक्षा की जा रही है। पांच दिन पहले हुई घटना के बाद टनल के नीचे निर्माण कार्य रोक दिया गया था, इसलिए मौके पर कोई मजदूर नहीं था।

उन्होंने बताया कि धंसाव वाले स्थान से अरावली पहाड़ की टनल शुरू होती है। पहाड़ और मिट्टी की चट्टानों के कमजोर होने से रिसाव की आशंका है। डिजाइनरों और विशेषज्ञों को बुलाया गया है। सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग की गई है। खेतों में हुए नुकसान का आकलन कराकर भरपाई की जाएगी।

ग्रामीणों ने लगाया लापरवाही का आरोप

गौरतलब है कि पांच अक्टूबर को भी टनल निर्माण के दौरान एक किसान के खेत में करीब 20 मीटर के दायरे में गड्ढा बन गया था। ग्रामीणों ने तब निर्माण कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस और प्रशासन से शिकायत की थी। अब दोबारा बड़े धंसाव से ग्रामीणों में भय का माहौल है।

ग्रामीणों ने उचित मुआवजा और जमीन के नुकसान का समाधान नहीं होने पर निर्माण कार्य नहीं चलने देने की चेतावनी दी है। ग्रामीण पहले भी धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं और संसद से लेकर रेल मंत्री तक गुहार लगा चुके हैं।

हादसे की सूचना मिलते ही एसडीएम तावडू जितेंद्र गर्ग और उपायुक्त अखिल पिलानी मौके पर पहुंचे तथा सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। डीएसपी अभिमन्यु लोहान ने बताया कि पुलिसकर्मी तैनात हैं और स्थिति नियंत्रण में है। करीब 1,200 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस टनल में बार-बार धंसाव होने से निर्माण की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

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