जागरण संवाददाता, नूंह : जिले में बाल मजदूरी लगातार बढ़ रही है। चाय की दुकानों से लेकर वाहनों की वर्कशॉप तक पर बाल मजदूरों को काम करते देखा जा सकता है। यह हालात केवल एक शहर के नहीं बल्कि गांवों से लेकर हरेक खंड में हैं। जिला प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है, हालांकि कुछ सामाजिक संस्थाएं जरूर इस दिशा में कार्य कर रही हैं। उनके द्वारा कई बाल मजदूरों को दुकानदारों के चंगुल से मुक्त कराकर परिजनों को भी सख्त चेतावनी दी है। लेकिन जिला प्रशासन का इस दिशा में बहुत लचर रवैया रहा है। जिला प्रशासन की तरफ से बाल मजदूरी पर रोक लगाने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया गया।

बता दें कि जिले में बच्चे को थोड़ा सा बड़ा होने पर मां-बाप उसे पढ़ाने की बजाय बाल मजदूरी में धकेल देते हैं। जिन बच्चों के हाथ में पेंसिल व कॉपी होनी चाहिए वही हाथ आज होटलों, ईट भट्ठों, मोटर कार्यशालाओं तथा अन्य जगहों पर मजदूरी कर रहे हैं। इसका परिणाम उन मासूमों को पूरी जिदगी भुगतना पड़ता है।

नूंह में जगह-जगह बच्चों को मजदूरी करते देखे जा सकता है, लेकिन किसी अधिकारी का ध्यान इस ओर नहीं है। जिले में डंपरों की संख्या ज्यादा है, जिससे यहां मैकेनिकों का कार्य भी ज्यादा है। ऐसे में बच्चे ज्यादातर मैकेनिक गिरी का कार्य ही करते हैं। वहीं वे भारी सामान भी उठाते रहते हैं, जिससे कई बार इनके साथ दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं।

कुछ दुकानदारों ने बताया कि जिले में बाल मजदूरी का प्रचलन ज्यादा है। लेकिन मां-बाप खुद बच्चों को इस दलदल में धकेलते हैं, जोकि गलत है। जिला प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि जिले में बाल मजदूरी को रोकने के लिए अभियान चलाया जाए। विभाग द्वारा समय-समय पर बच्चों से मजदूरी कराने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाता है। कई बार जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जाता है, जिससे बाल मजदूरी में कमी आई है।

- आबिद हुसैन, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, नूंह

Posted By: Jagran

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