संवाद सहयोगी, अटेली: अंतरराष्ट्रीय पहलवान राव पृथ्वी सिंह ने अपनी जिदगी में अब तक देश के 300 से ज्यादा पहलवानों को हराकर परचम लहराया। राव ने अमेरिका के भी कई पहलवानों को हराया था। दो माह पहले ही डब्ल्यूडब्ल्यूई का ट्रायल क्लियर कर सिगापुर में आइएसपीडब्ल्यू में खेल कर लौटे थे। विश्व खेल मानचित्र में चमक रहा यह सितारा अपने ही घर में हार गया। परिवार में गम का माहौल है और उनके स्वजन का मानना है कि राव पृथ्वी सिंह ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसे जहर देकर मारा गया है। मंगलवार शाम को उनके गांव में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान ग्रामीणों और उनके स्वजन ने आरोप लगाए कि पृथ्वी सिंह को जहर दिया गया है। यह पुरस्कार किए थे अपने नाम: राव पृथ्वी सिंह ने अभी तक 78 से ज्यादा पुरस्कार जीते और 16 विश्व टैग टीम चैंपियनशिप खिताब भी अपने नाम कर चुके थे। इनमें भारत का सर्वश्रेष्ठ पेशेवर पहलवान पुरस्कार, अंतरराष्ट्रीय आइकन पुरस्कार, अंतरराष्ट्रीय अवार्ड पुरस्कार, वंशधारा पुरस्कार, हरियाणा गौरव पुरस्कार, आदि शक्ति कला फिल्म पुरस्कार, उत्तर प्रदेश बुक आफ व‌र्ल्ड रिकार्ड, इंडिया स्टार गोल्डन पुरस्कार, योद्धा सम्मान पुरस्कार शामिल हैं। खली को मानते थे अपना गुरु: शुभम यादव उर्फ राव पृथ्वी सिंह एक किसान परिवार से थे। उनका बचपन अलवर में बीता। अलवर से उन्होंने काफी चुनौतियों का सामना किया। एक समय ऐसा था जब उनके पास पढ़ने तक को भी फीस के पैसे नहीं थे। तब महज नौ साल की उम्र में आर्थिक स्थिति ने इनको ठेले पर काम करने को मजबूर कर दिया था। राव पृथ्वी सिंह ने पढ़ाई पूरी करने के बाद पृथ्वीपुरा में शिफ्ट हो गए जोकि हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में आता है। इन्होंने पंजाब में द ग्रेट खली अकादमी के बारे में जाना और कुश्ती सीखने के लिए खुद को तैयार किया। वह द ग्रेट खली को अपना गुरु मानते थे। अपने जीवन के आठ साल अपने गुरु द ग्रेट खली से परीक्षण लिया और मेहनत करते हुए पहलवानी के गुर सीखे। कुश्ती में एक से बढ़कर एक पहलवान और देश-विदेश के शहरों के साथ जीत का सिलसिला जारी रखा। वह धोती, कुर्ता व पगड़ी पहनकर अपनी संस्कृति को बढ़ावा देते थे और फाइट भी धोती कुर्ते में ही करते थे।

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