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Sawan 2026: 12 ज्योतिर्लिंगों और पावन तीर्थों की माटी से हर दिन रचे जाएंगे 2100 शिवलिंग, शुरू हुआ श्रावण अनुष्ठान

Published: Thu, 30 Jul 2026 05:48 PM (IST)

नारनौल के महंत तेजादास आश्रम में श्रावण मास के शुभारंभ पर पार्थिव शिवलिंग निर्माण महाअनुष्ठान शुरू हुआ।

ब्रह्ममुहूर्त में प्रतिदिन 2100 पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जाएगा

ब्रह्ममुहूर्त में प्रतिदिन 2100 पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जाएगा

HighLights

  1. नारनौल में श्रावण मास पार्थिव शिवलिंग निर्माण अनुष्ठान शुरू।

  2. 12 ज्योतिर्लिंगों व तीर्थों की मिट्टी से 2100 शिवलिंग।

  3. पवित्र नदियों के जल से होगा रुद्राभिषेक।

जागरण संवाददाता, नारनौल। श्रावण मास गांव पटीकरा से शाहपुर दोयम मार्ग स्थित महंत तेजादास आश्रम परिसर में पवित्र श्रावण मास के शुभारंभ अवसर पर वीरवार को विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पार्थिव शिवलिंग निर्माण महाअनुष्ठान का शुभारंभ हुआ।

सर्वप्रथम आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने यजमान विनोद कुमार, सुरेश सरपंच, सुरेंद्र सोढ़ी, रवीन्द्र कुमार, राजेंद्र जैलदार तथा जगजीत से विधिवत पूजन-अर्चन करवाकर अनुष्ठान का शुभारंभ कराया।

महंत नंदकिशोर दास महाराज ने बताया कि हर साल की भांति इस साल भी श्रावण मास के प्रथम दिवस ब्रह्ममुहूर्त में श्रद्धालुओं ने पार्थिव शिवलिंग निर्माण का शुभारंभ किया गया।

उन्होंने बताया कि इस विशेष अनुष्ठान के लिए रामेश्वरम, केदारनाथ, महाकाल, ओंकारेश्वर, सोमनाथ, वैद्यनाथ, नागेश्वर, मल्लिकार्जुन, घृष्णेश्वर, त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर एवं काशी विश्वनाथ सहित सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के साथ-साथ बद्रीनाथ धाम, द्वारकापुरी, मथुरा-वृंदावन, अमरकंटक आदि पवित्र तीर्थस्थलों की पावन मिट्टी एकत्रित की गई है।

इन नदियों के जल का होगा उपयोग

इसी पवित्र मिट्टी से प्रतिदिन 2100 पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद गंगा, यमुना, नर्मदा, कावेरी, गोदावरी, ताप्ती, सरस्वती, क्षिप्रा, कृष्णा सहित विभिन्न पावन नदियों तथा प्रयागराज संगम से लाए गए पवित्र जल से भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाएगा।

आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण तथा पूजन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। श्रद्धा एवं विधि-विधान से पार्थिव शिवलिंग का पूजन तथा जलाभिषेक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

श्रद्वालुओं के सभी रोग, कष्ट व बाधाएं दूर होती हैं तथा साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस अवसर पर काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

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