नारनौल [बलवान शर्मा]। खनन विभाग के अधिकारियों को ट्रैक्टर चालक के खिलाफ 21 महीने बाद एफआईआर दर्ज करवाना महंगा पड़ गया है। इस मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अब्दुल माजिद ने जहां आरोपित ट्रैक्टर चालक को जमानत पर रिहा करने के आदेश दे दिए हैं, वहीं कानून का दुरुपयोग करने पर खनन अधिकारी के खिलाफ उपायुक्त व पुलिस कप्तान को कार्रवाई के लिए लिखा है।

इस संबंध में खनन अधिकारी ने दो अप्रैल को शहर पुलिस थाने में राजस्थान के झुंझनू जिले के गांव चुढ़िना निवासी भीमसिंह के खिलाफ अवैध रूप से खनिज चोरी करने का मामला दर्ज करवाया था। उनका आरोप था कि आरोपित को खनन विभाग के इंस्पेक्टर ओमदत्त शर्मा की टीम ने 30 अगस्त, 2019 को सतनाली रोड पर बगैर लाइसेंस व अनुमति के ट्रैक्टर-ट्राली में अवैध रूप से खनिज (रोड़ी पत्थर) ले जाने के आरोप में पकड़ा था। इस मामले में आरोपित पक्ष के अधिवक्ताओं ने न्यायालय के समक्ष खनन अधिकारी पर अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने व कानून के दायरे से बाहर आकर पुलिस विभाग में प्राथमिकी दर्ज करवाने की दलील दी।

इसके साथ ही 21 माह बाद एफआईआर दर्ज करवाने को गलत बताया। खनन अधिकारी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपित ट्रैक्टर चालक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही थी और उसके द्वारा सहयोग नहीं करने के कारण उसके खिलाफ 21 माह बाद एफआईआर दर्ज करवाई गई है। न्यायाधीश अब्दुल माजिद ने खनन अधिकारी के तर्क को न केवल गलत माना, बल्कि 21 महीने बाद एफआईआर दर्ज करवाने को नियम 101(6)(वी)की अवहेलना माना। उन्होंने दो टूक स्पष्ट कर दिया कि खनन अधिकारी ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है।

एक गरीब व्यक्ति को तो अवैध खनन करने के मामले में फंसाया जा रहा है और बड़ी मछलियां खुले आम अवैध माइनिंग कर रही हैं। उनकी तरफ खनन अधिकारी आंखें बंद किए हुए हैं। न्यायाधीश ने आरोपित को 50 हजार रुपये के बॉंड पर स्थायी जमानत दे दी। साथ ही उन्होंने इस फैसले की कापी उपायुक्त व पुलिस कप्तान को भी भेजकर शक्तियों का दुरुपयोग करने वाले खनन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को कहा है।

रात दस बजे के बाद नारनौल की सड़कों पर गुजरना नहीं है खतरे से खाली

बता दें कि लाकडाउन खुलने के बाद से नारनौल शहर में रात दस बजे के बाद रोड़ी पत्थर ढोने वाले हजारों ट्रक व डंपरों का सड़कों पर कब्जा हो जाता है। ये डंपर चालक बड़ी तेजी से अपने वाहनों को दौड़ाते हैं और छोटे वाहन चालकों के लिए इनके बीच से गुजरना खतरे से खाली नहीं होता है।

Edited By: Prateek Kumar