विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

छह नर्सरियों से निकलेगी हरियाली की फौज, साढ़े चार लाख पौधे बदलेंगे नारनौल की तस्वीर

Published: Mon, 15 Jun 2026 01:11 PM (IST)

महेंद्रगढ़ जिले में मानसून से पहले वन विभाग साढ़े चार लाख पौधे तैयार कर रहा है। इन पौधों को पेड़ ...और पढ़ें

नर्सरियों में तैयार हो रही हरियाली की सेना, वर्षा के साथ जिलेभर में महाअभियान शुरू होगा।

नर्सरियों में तैयार हो रही हरियाली की सेना, वर्षा के साथ जिलेभर में महाअभियान शुरू होगा।

HighLights

  1. वन विभाग ने मानसून से पहले की बड़ी तैयारी।

  2. साढ़े चार लाख पौधे नर्सरियों में हो रहे तैयार।

  3. पौधों को पेड़ बनने तक पांच साल निगरानी।

विपिन कुमार, नारनौल। महेंद्रगढ़ जिले की सूखी धरती को हरियाली की चादर ओढ़ाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। जिले की छह सरकारी नर्सरियां इन दिनों हरियाली की ''फैक्ट्री'' बनी हुई हैं, जहां करीब साढ़े चार लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं। मानसून की दस्तक के साथ ही ये पौधे गांवों, सड़कों, स्कूलों, सरकारी संस्थानों और खाली पड़ी भूमि पर रोपे जाएंगे।

मानसून से पहले वन विभाग की बड़ी तैयारी

वन विभाग का दावा है कि यह अभियान जिले के वन आवरण को बढ़ाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा प्रयास साबित हो सकता है। जिले में तीन नर्सरियां महेंद्रगढ़, दो नारनौल और एक भुगारंका में संचालित हैं।

इन नर्सरियों में पिछले कई महीनों से पौधों को तैयार किया जा रहा है ताकि वर्षा शुरू होते ही बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जा सके। इस बार विभाग ने केवल पौधे तैयार करने पर ही नहीं, बल्कि उन्हें वर्षों तक सुरक्षित रखने की रणनीति भी बनाई है।

हर पौधा होगा भविष्य की छांव का आधार

नर्सरियों में नीम, बरगद, पीपल, कीकर, लसोड़ा, खैरी, बेरी, गूलर, सीरस और पहाड़ी पापड़ी जैसी स्थानीय जलवायु के अनुकूल प्रजातियां तैयार की जा रही हैं। ये पेड़ कम पानी में भी जीवित रह सकते हैं और आने वाले वर्षों में छांव, आक्सीजन तथा पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार बनेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय प्रजातियों के पौधे न केवल तेजी से विकसित होते हैं बल्कि पक्षियों और अन्य जीवों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं।

नर्सरी से जमीन तक होगी पूरी निगरानी

वन विभाग इस बार केवल पौधे बांटकर अपनी जिम्मेदारी खत्म नहीं करेगा। विभाग की योजना पौधों की देखरेख अवधि को तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नर्सरियों में तैयार किया गया पौधा वास्तव में पेड़ बनकर खड़ा हो।

पिछले वर्षों में मुफ्त वितरण के बाद बड़ी संख्या में पौधे या तो रोपे नहीं गए या फिर देखभाल के अभाव में नष्ट हो गए। नई व्यवस्था में पौधों के संरक्षण और जीवित रहने की दर बढ़ाने पर सबसे ज्यादा जोर रहेगा।

महेंद्रगढ़ वन मंडल का वन क्षेत्र विवरण

वन श्रेणी क्षेत्रफल (हेक्टेयर)

  • आरक्षित वन 1,662.01
  • संरक्षित वन :
  • सड़क क्षेत्र 1,213.92
  • नहर क्षेत्र 847.44
  • बांध/बंद क्षेत्र 97.68
  • रेलवे लाइन क्षेत्र 235.22
  • सघन संरक्षित वन 6,539.67
  • अवर्गीकृत वन 37.94
  • धारा 38 समाप्ति क्षेत्र 544.72
  • धारा 4 एवं 5 समाप्ति क्षेत्र 1,088.52
  • गांवों के स्वामित्व वाली अरावली भूमि 4,388.18
  • कुल वन क्षेत्र 16,655.30

 

 

जिले की छह नर्सरियों में बड़े पैमाने पर पौधे तैयार किए जा रहे हैं। हमारा लक्ष्य सिर्फ पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें जीवित रखकर वन क्षेत्र बढ़ाना है। -

-

रजनीश यादव, वन राज्यिक अधिकारी, नारनौल