हरियाणा के आलोक ने Chrome Browser से डेटा चोरी का खतरा रोका, ढूंढ निकाला बग; गूगल ने दिया 1,000 डॉलर इनाम
नीरपुर निवासी इंजीनियर आलोक यादव ने क्रोम ब्राउजर में एक गंभीर बग खोजा है, जिससे डेटा चोरी का खतरा था, जिसके लिए गूगल ने उन्हें $1000 का इनाम दिया है।

गूगल की ओर से इंजीनियर आलोक यादव को भेजी गई पेमेंट। फोटो: स्वयं
HighLights
इंजीनियर आलोक यादव ने क्रोम ब्राउज़र में डेटा चोरी का बग खोजा
गूगल ने इस खामी को ठीक करने के लिए $1000 का इनाम दिया
आलोक ने अब तक गूगल से कुल $6000 के पुरस्कार जीते हैं
जागरण संवाददाता, नारनौल। नीरपुर निवासी इंंजीनियर आलोक यादव ने एक बार फिर क्रोम ब्राउज़र में बग ढूंढकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और गूगल से एक हजार अमेरिकन डालर का इनाम पाया है।
इससे पहले भी आलोक 2019 में पांच हज़ार अमेरिकन डालर का इनाम जीत चुका है। क्रोम ब्राउजर में एक से अधिक साइट खोलने पर डेटा चोरी हो सकता है।
इस खामी को पकड़ने पर गूगल ने तीन साल में खामी को न केवल दुरुस्त किया,बल्कि इंजीनियर आलोक यादव को एक हजार अमेरिकन डालर इनाम भी दिया है।
इंटरनेट को सुरक्षित बनाने में जुटे
आलोक की पत्नी भावना यादव ने बताया कि उनके पति पेशे से साफ्टवेयर इंजीनियर (गो-लैंग्वेज डेवलपर) हैं और शौकिया तौर पर बग स्पेशलिस्ट भी हैं। उपयोगकर्ताओं के लिए इन्टरनेट को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से वे बीटेक के समय से ही बग ढूंढते आ रहे हैं।
पहला बग 2017-18 में गूगल के ही क्रोम ब्राउज़र में ढूंढा था, जो बेहद गंभीर प्रवृति का था और उसके लिए वर्ष 2019 में गूगल ने उन्हें पांच हजार अमेरिकन डालर (पौने चार लाख रुपये) का इनाम दिया था।
2024 में रिपोर्ट किए दो बग
भावना ने बताया कि आलोक यादव ने 2024 में फिर दो बग गूगल को रिपोर्ट किए थे, जिनमें से एक को गंभीर प्रवृति का मानते हुए गूगल ने उन्हें कल 14 सितंबर को एक हजार अमेरिकन डालर (लगभग एक लाख रुपये) का पुरस्कार दिया है।
पुरस्कार राशि उनके खाते में भेज दी गई है। अब तक आलोक गूगल से छह हज़ार अमेरिकन डालर (लगभग पांच लाख रुपये) के पुरस्कार जीत चुके हैं, जबकि अभी और बग पेंडिंग हैं, जिनका फैसला होना बाकी है। गूगल क्रोम के अलावा उन्होंने और दूसरी ऐप्स और वेबसाइट में भी बग निकालकर ठीक करवाए हैंं।
कंप्यूटर साइंस में किया बीटेक
एसवीएन स्कूल, नीरपुर से नान मेडिकल में बारहवीं पास करने और जेईई मेंस क्लियर करने के बाद आलोक यादव ने जालंधर से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक की है।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टीसीएस कंपनी में ट्रेनी इंंजीनियर के रूप में की थी| मालूम हो आलोक, ख्यातिनाम दोहाकार और वरिष्ठ साहित्यकार रघुविन्द्र यादव तथा सामाजिक कार्यकर्ता शील यादव का बेटा व डा. अलका यादव का भाई है|
दूसरी साइट से डेटा चोरी का खतरा
आलोक यादव ने बताया कि उदायहरण के तौर पर क्रोम ब्राउजर में यदि आपने बैंक की साइट खोल ली और इसके बाद कोई अन्य साइट खोल ली। ऐसे में दोनों ही साइट खुली रह जाती थी। बाद वाली साइट पहले वाली साइट का डाटा चोरी कर सकती है।
यह खामी पकड़ने के बाद गूगल को पत्राचार किया गया था। गूगल ने इसको लेकर पहले तो स्वीकार नहीं किया, लेकिन तीन साल बाद अब इस खामी को दुरुस्त कर दिया है। खामी दुरुस्त करने के बाद एक हजार डालर भी दिए हैं।
