दीपक वशिष्ठ, इस्माईलाबाद :

वेलकम बैक एंड टेक यूअर ब्ले¨सग। यह शब्द कहकर आस्ट्रेलिया के डाजा लेवल ने ग्रामीणों से विदा ली तो कइयों की आंखें नम हो गई। डाजा लोवल ने बिना फीस व बिना दवा के अपने हाथों के जादू से चार दिन में 670 मरीजों का उपचार किया। डाजा ने जोड़ों व सरवाइकल के मरीजों को पल भर में राहत दिलाई तो उन्हें इसके बदले खूब दुआएं मिली।

मेलबर्न के रहने वाले डाजा लोवल फाइटर रहे हैं। उन्होंने अपने देश में कई साल तक यह प्रशिक्षण लिया कि जोड़ों व सरवाइकल पेन को कैसे नस दबाकर गायब किया जा सकता है। इसमें वे इतने माहिर हैं कि सामने वाले का दर्द झट से भांप लेते हैं। यहां उनके दोस्त फाइटर स्टीलमैन अमनदीप ¨सह ने जब उनकी महारत ग्रामीणों को बताई तो तुरंत गुरूद्वारा साहिब में शिविर लगाया गया। दैनिक जागरण ने प्रमुखता से डाजा द्वारा मुफ्त इलाज से संबंधित समाचार प्रकाशित किया। इसके बाद मरीजों का तांता लग गया। प्रदेश से ही नहीं चंडीगढ़ व दिल्ली तक से मरीज आने आरंभ हो गए। डाजा लोवल ने चार दिन में 670 मरीजों की तीमारदारी की। ऐसे दर्जन भर मरीज तक पैदल चलाए जो कि कमर दर्द के कारण सालों से चारपाई से चिपके थे। यहां गुरूद्वारा साहिब में डाजा को कमेटी की ओर से प्रधान कुलवंत ¨सह, गो¨वद्र ¨सह सिद्धू व सरदार तारा ¨सह ने सिरोपा भेंट कर विदाई दी। डाजा ने कहा वेलकम बैक एंड टेक यूअर ब्ले¨सग यानी लौट कर आऊंगा और आपकी दुआएं बटोर ले जाऊंगा। दो माह का लगेगा शिविर स्टीलमैन अमनदीप ¨सह ने बताया कि डाजा लोवल छह माह बाद ¨हदुस्तान आएंगे। उस समय लगातार दो माह का बिल्कुल मुफ्त शिविर लगाया जाएगा। इसमें प्रत्येक रविवार ऐसे मरीजों के घर जाएंगे जिन्हें शिविर तक नहीं लाया जा सकता है। डाजा लोवल ने बताया कि वे उस समय उन मरीजों से भी मिलेंगे जिन्हें अब इलाज दिया गया है। अपने साथ ले गए दैनिक जागरण डाजा को भले ही ¨हदी नहीं आती। मगर वह जितने दिन रहे दैनिक जागरण को निहारना नहीं भूले। डाजा ने अपनी भाषा में कहा कि दैनिक जागरण परोपकार का दूसरा नाम है। वे अपने साथ दैनिक जागरण की प्रतियां ले जाना नहीं भूले। इन्हें वे अपने संग्रहालय में जगह देंगे।

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