जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. मंजूला चौधरी ने नैक के सात मापदंडों के बारे में बात करते हुए कहा कि किस तरह से कॉलेज के शैक्षणिक कार्यों को नैक के मापदंडों के अनुरूप ढाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में नैक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि सरकारी अनुदान व कॉलेजों व यूनिवर्सिटी को मिलने वाली वित्तीय सहायता नैक ग्रेड के अनुसार प्राप्त होती है। वे मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आरके सदन में प्रदेश के सरकारी व एडिड कॉलेजों के प्रिसिपल और नोडल आफिसरों के लिए आयोजित एक दिवसीय नैक जागरूकता कार्यशाला में बतौर मुख्यातिथि बोल रहीं थीं।

उन्होंने अपने अनुभव सांझा करते हुए सुझाव दिए कि किस प्रकार से कॉलेजों के ग्रेड में सुधार कर सकते हैं। कहा कि कॉलेजों को नैक की एसएसआर स्वयं तैयार करनी चाहिए दूसरे बाहरी सलाहकारों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। डीन आफ कालेज प्रो. रजनीश कुमार शर्मा ने सभी मेहमानों का स्वागत किया। विश्वविद्यालय की नैक स्टियरिग कमेटी के को-आर्डिनेटर प्रो. श्याम कुमार ने नैक पैरामीटर के बारे में विस्तार किया व अपने अनुभव सांझा किए। आइक्यूएसी को-आर्डिनेटर व कार्यक्रम के संचालक प्रो. दिनेश कुमार ने नैक से आए प्रतिनिधियों का सबसे परिचय करवाया। यह कार्यशाला एसपीडी रूसा हरियाणा द्वारा प्रायोजित थी। इस कार्यक्रम में लगभग 250 कालेज प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस मौके पर नैक से डिप्टी एडवाइजर डॉ. प्रतिभा सिंह व नैक ईसी के सदस्य डॉ. प्रतिभा जौली ने अपने व्याख्यान दिए। मंच का संचालन डॉ. अजय सोलखे ने किया। इस मौैके पर प्रो. प्रदीप कुमार, डॉ.अजय अग्रवाल, डॉ. विजय सहित कई शोधार्थी मौजूद थे।

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Posted By: Jagran

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