जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र :

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के शिल्प और सरस मेले में ब्रह्मसरोवर के घाटों पर कई भाषाओं और कलाओं का संगम दिख रहा है। मेले में आए दिन विभिन्न राज्यों से पहुंच रहे कलाकार अपनी-अपनी लोक कलाओं को प्रदर्शित कर रहे हैं। ऐसे में ब्रह्मसरोवर के घाटों पर पहुंचने वाले पर्यटक विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं, संस्कृति, परंपराओं, नृत्य और शिल्पकलाओं का आनंद ले रहे हैं। इस महोत्सव की शिल्प कला और लोक कला को देखने के लिए रूस और बंग्लादेश के सैलानी भी पहुंचे हैं। महोत्सव के छठे दिन बृहस्पतिवार को रूस से 15 सैलानियों का एक ग्रुप और बंग्लादेश से सात सैलानियों का एक ग्रुप शिल्प और सरस मेले के साथ-साथ महोत्सव का आनंद लेने के लिए पहुंचा। रूस के ग्रुप का नेतृत्व मंगलम कर रहे थे, रूस निवासी मंगलम को भगवान श्रीकृष्ण की धरा कुरुक्षेत्र और हिदी से खासा लगाव है। इस लगाव के चलते मंगलम ने रूस में रविद्र नाथ टैगोर बाल निकेतन के नाम से हिदी संस्थान को चला रहे हैं। इसके अलावा बंग्लादेश के गु्रप का नेतृत्व पुलकराह कर रहे थे। इन विदेशी सैलानियों ने खादी, कश्मीर के शाल और सूट के साथ- साथ अन्य स्टालों से खरीदारी की और मेले का खूब आनंद लिया। महोत्सव में उत्तर क्षेत्र संस्कृति केंद्र पटियाला की तरफ से विभिन्न प्रदेशों से लोक कलाकारों ने आज अपने-अपने प्रदेश की लोक संस्कृति को अपने नृत्यों और पारंपरिक वेश-भूषा के माध्यम से प्रदर्शित किया। इन कलाकारों ने अपने-अपने देश की भाषा में लोक गीत गाए। इस भाषा और लोक नृत्यों के मिश्रण ने ब्रह्मसरोवर के तट पर एक अलग छठा बिखेरने का काम किया। इन कलाओं की संगम स्थली को देखने के लिए दूर दराज से पर्यटकों की संख्या में दिन प्रतिदिन इजाफा हो रहा है।

Posted By: Jagran

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