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'मैं अकेला कैसे रहूंगा पापा...', सब-इंस्पेक्टर कर्मबीर सिंह को नम आंखों से बेटे ने दी विदाई

Published: Mon, 31 Aug 2026 08:25 PM (IST)

सब-इंस्पेक्टर कर्मबीर सिंह के निधन पर उनके इकलौते बेटे सागर ने पिता को मुखाग्नि देते हुए भावुक विदाई दी। श्मशानघाट में मौजूद हर आंख नम थी।

मैं अकेला कैसे रहूंगा, पापा, आपने तो साथ देने का वादा किया था: बेटा सागर

मैं अकेला कैसे रहूंगा, पापा, आपने तो साथ देने का वादा किया था: बेटा सागर

HighLights

  1. इकलौते बेटे सागर ने पिता को मुखाग्नि दी

  2. श्मशानघाट में पुलिस अधिकारी और ग्रामीण मौजूद थे

  3. एसपी अंबाला ने परिवार को सांत्वना दी

दीप चंद, इस्माईलाबाद। मुझे छोड़ कर ना जाओ, मैं अकेला कैसे रहूंगा, आपने तो सदा साथ देने का वादा किया था। यह शब्द बिलखते इकलौते बेटे सागर के मुख से उस समय निकले जब वह अपने दिवंगत पिता नग्गल थाना के प्रभारी रहे सब इंस्पेक्टर कर्मबीर सिंह की चिता को मुखाग्नि दे रहा था।

यह दृश्य देखकर श्मशानघाट में हर आंख नम हो उठी और पुलिस अधिकारी तक सन्न नजर आए। सोमवार को पिहोवा विधानसभा क्षेत्र के गांव रामगढ़ रोड़ की हर गली में सन्नाटा पसरा था। कर्मबीर सिंह के शव को लेकर जैसे ही एंबुलेंस गांव में पहुंची तो चीत्कार मच गया।

गांव के बाहर फिरनी की मुख्य गली में कर्मबीर सिंह के घर के आगे सैकड़ों लोग जमा थे। किसी के मुख से शब्द तक नहीं निकल रहे थे। हर व्यक्ति गमजदा था। तीन जिलों के पुलिस अधिकारी पहुंचे हुए थे। शव जब घर के भीतर ले जाया गया तो कर्मबीर की माता, पत्नी, भाई, भतीजे, घर की बहुएं, बेटे सागर व बेटी रवीना की चीख पुकार हर किसी के दिल को चीरती हुई निकल गई।

महिलाओं का करुण रुदन हर आंख को नम करने वाला था। शव जब घर से बाहर गली में लाया गया तो परिवार जैसे बिखर कर रह गया। कर्मबीर सिंह से सदा के लिए बिछड़ने के दर्द ने हर किसी को भीतर तक हिला कर रख दिया। जिस घर आंगन में कर्मबीर खेल कूद कर बड़ा हुआ, आज वहीं से चार कंधों पर विदा हो रहा था।

ठसाठस भरा था श्मशानघाट

गांव का श्मशान घाट ठसाठस भरा हुआ था, इस कारण श्मशानघाट के शेड के नीचे नहीं, बल्कि कर्मबीर सिंह की चिता खुले आसमान के नीचे सजाई गई। सबसे पहले अंबाला के एसपी अजीत सिंह शेखावत ने श्रद्धांजलि दी। इसके बाद डीएसपी विजय कुमार, पिहोवा के थाना प्रभारी सतीश कुमार सहित अन्य पुलिस अधिकारियों ने एक-एक कर श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद पुलिस जवानों की टुकड़ी ने सलामी दी। 1998 से 2026 तक हरियाणा पुलिस में सेवा देने वाले कर्मबीर सिंह को तीन जिलों से पुलिस मुलाजिम वर्दी व सिविल ड्रेस में अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। आसपास के इलाके के अंबाला जिले व कुरुक्षेत्र जिले के गणमान्य लोग व आमजन तक कर्मबीर के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचे।

कर्मबीर वाकई कर्मों का बीर था

गांव में यहां वहां जमा ग्रामीणों में एक ही चर्चा थी कि कर्मबीर अपने कर्मों का भी धनी था। वे हर किसी को अपना बनाने की खूबी रखता था। उसी का प्रमाण था कि आज उसे अंतिम विदाई देने लोगों का सैलाब उमड़ा हुआ था।

ग्रामीण बताते हैं कि कर्मबीर वह हंसमुख, मिलनसार, नरमदिल व्यक्ति था। यही प्रशंसा उन लोगों से सुनने को मिली, जो ड्यूटी के दौरान कर्मबीर सिंह के अधिकांश समय संपर्क में रहे। आसपास के गांवों के लोगों का यही कहना था कि वह अपने कर्मों से सदैव याद रखा जाएगा।

एसपी पहुंचे परिवार के बीच

अंबाला के एसपी अजीत सिंह शेखावत श्मशानघाट में अंतिम विदाई देने के बाद घर पर परिवार के बीच पहुंचे। उन्होंने कहा कि एक नेकदिल व मेहनती अफसर खोया है। उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और कहा कि पुलिस महकमा परिवार के संग खड़ा है।

परिवार को कभी कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। इस मौके पर मौजूद कर्मबीर सिंह के सहयोगी पुलिस कर्मचारियों ने भी परिवार को भरोसा दिलाया कि वे हर समय मदद के लिए उपलब्ध मिलेंगे।

बेटा सवेरे आया और पिता को मुखाग्नि दी

इकलौता बेटा सागर सात साल से कनाडा में रहता है। अपने पिता से बातें करता रहता था। सागर ने कहा कि उसके पिता हमेशा कहते थे कि वे उसके साथ खड़े हैं, मगर आज होनी को कुछ और ही मंजूर था। सागर अपनी बहन रवीना के साथ सवेरे ही दिल्ली पहुंचा। वहां से सीधा घर आया तो पिता को सदा के लिए विदाई दी।