जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : प्रदेश के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने कहा है कि श्रीमद्गवद गीता दुनिया को कर्म प्रधान विश्व का संदेश देती है। दुनिया में प्रत्येक व्यक्ति जब कर्मयोगी बनेगा तभी सद्भाव, प्यार व भाईचारा बढ़ेगा। कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि में भगवान कृष्ण ने दुनिया को श्रीमदभगवद गीता के रूप में दिव्य संदेश दिया था। इसी का परिणाम है कि आज कुरुक्षेत्र की मिट्टी, जल और वायु तीनों ही मुक्ति देने वाले हैं। ऐसे पौराणिक, धार्मिक ग्रंथ का संदेश दुनिया के कोने-कोने में पहुंचे व जन कल्याण के लिए इस संदेश का प्रयोग हो इसलिए गीता महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है। वह मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ओडिटोरियम हॉल में श्रीमदभगवद गीता का शाश्वत दर्शन एवं सार्वभौमिक कल्याण विषय पर अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि गीता एक धार्मिक ग्रंथ होने के साथ-साथ एक जीवन दर्शन है, जिसको अपनाकर कोई भी राष्ट्र अपना विकास कर सकता है। गीता सार्वभौमिक व कल्याणकारी है।

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आस्ट्रेलिया और कनाडा में मनोगा गीता महोत्सव : मनोहर

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि श्रीमदभगवद गीता और इसके संदेश को विश्व के हर घर तक पहुंचाना जरूरी है। इसके लिए प्रदेश सरकार चार साल से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मना रही है। इसी कड़ी में मॉरीशस और लंदन में भी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया गया है। मार्च में आस्ट्रेलिया और जुलाई माह में कनाडा में भी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया जाएगा। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए कुरुक्षेत्र को श्रीकृष्णा सर्किट में रखा गया है और कुरुक्षेत्र या करनाल में अंतरराष्ट्रीय हवाई पट्टी बनाने पर विचार चल रहा है।

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गीता से उत्तराखंड का सीधा जुड़ाव : त्रिवेंद्र

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड का गीता से सीधा जुड़ाव है। पांडवों से जुड़ी कथाओं का मंचन वहां के नृत्य व तीज-त्योहारों में होता है। यह उत्तराखंड के लोगों के लिए खुशी की बात है कि उन्हें महोत्सव में राज्य पार्टनर के रूप में शामिल किया गया है।

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इन्होंने ने भी रखे विचार

स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि नौ देशों के प्रतिनिधि व देश के विभिन्न राज्यों से विद्वान अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में पहुंचे हैं। प्रदेश के शिक्षा मंत्री कंवरपाल ने कहा कि गीता एक अद्भुत ग्रंथ है। इसका जितना अध्ययन करें यह उतना ही प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि अधर्म व अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ने का रास्ता श्रीमदभगवद गीता सिखाती हैं। जिम्बाब्वे के डिप्टी हाई कमिश्नर ने कहा कि गीता का संदेश सर्वकल्याणकारी है। इंग्लैंड से आए उमेश शर्मा, सिडनी आस्ट्रेलिया से आए सेवा सिंह, केंद्रीय विवि हिमाचल के चांसलर एचएस बेदी, मारीशस से विश्वानंद ने भी अपने विचार प्रकट किए। इस मौके पर युवा एवं खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह, विधायक सुभाष सुधा, कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा, डीसी डॉ. एसएस फुलिया मौजूद रहे।

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तीन दिवसीय संगोष्ठी में पहुंचे नौ देशों के विद्वान

इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में नौ देश, 15 राज्यों से 500 से अधिक बुद्धिजीवी भाग ले रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में वैचारिक चितन होता है। शैक्षणिक उत्कृष्टता का विकास कुवि का मूल तत्व है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर 6 विभागों की ओर से गीता पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है।

Posted By: Jagran

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