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संवाद सहयोगी, इस्माईलाबाद

: अपनी सजा पूरी कर चुके सिखों को जेलों से रिहा न करने के विरोध में एक सिख गुरबख्श ¨सह खालसा ठसकाअली गांव में पानी की टंकी पर चढ़ गया। इस सिख ने इसके बाद भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इस सिख की मांग है कि देश की विभिन्न जेलों में बंद उन सिखों को रिहा किया जाए, जो आज भी बिना किसी सजा के जेलों की चाहरदीवारी में बंद हैं। सिख के टंकी पर चढ़ने की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया।

देश की विभिन्न जेलों में बंद सिखों की रिहाई की मांग को लेकर गुरबख्श ¨सह खालसा कई साल से आंदोलनरत हैं। गुरबख्श ¨सह खालसा मंगलवार को गांव की पानी की टंकी पर चढ़ गया। उसने मांग रखी कि सिखों को रिहा किया जाए। सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार कृष्ण ढुल, थाना प्रभारी दिनेश चौहान सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। बताया जा रहा है कि बुड़ैल जेल में बंद गुरमीत ¨सह, सुरजीत कौर, बल¨जद्र कौर, शमशेर ¨सह और शमशेर ¨सह आदि ने गुरबख्स ¨सह को जेल से रिहा कराने की मुहिम का जिम्मा सौंपा है। बंदी सिखों की रिहाई के लिए गुरबख्श ¨सह ने 13 नवंबर 2013 को गुरूद्वारा अंब साहिब मोहाली से भूख हड़ताल आरंभ की थी। उनकी 44 दिन की भूख हड़ताल को ज्ञानी गुरबचन ¨सह ने खुलवाया था और बंदी सिखों की रिहाई का वायदा किया था। इसके बाद गुरबख्श ¨सह ने मांग पूरी न होने पर 13 नवंबर 2014 को गुरूद्वारा दसवीं पातशाही लखनौर साहिब से भूख हड़ताल आरंभ की। यह भूख हड़ताल 65 दिन चली। इस भूख हड़ताल को सरकार व प्रशासन ने दबाव बनाकर खुलवाया। इसके बाद भी तीन साल बीतने के बाद बंदी सिख रिहा नहीं हो पाए हैं। ऐसे में गुरबख्श ¨सह ने अब अपने पैतृक गांव ठसकाअली में धरने से बिगुल बजा दिया है। गुरबख्श ¨सह पहले पानी की टंकी पर चढ़ गया। इसके बाद इस सिख ने अब पानी की टंकी के पास ही डेरा डाल भूख हड़ताल आरंभ कर दी है। मामले को लेकर प्रशासन के दिनभर हाथ पांव फूले रहे। गुरबख्श ¨सह का कहना है कि अब सजा पूरी कर चुके सिख बंदियों की रिहाई न होने तक भूख हड़ताल जारी रखी जाएगी।

गांव के नाम एक जैसे होने से अधिकारी परेशान रहे

गुरबख्श ¨सह खालसा पानी की टंकी पर ठसका अली गांव में चढ़ गया। अधिकारी ठसका मीरां जी गांव में पहुंच गए। जहां सरपंच दिलबाग ¨सह गुराया ने अधिकारियों को बताया कि ठसका अली गांव ठोल से शाहाबाद मार्ग पर है। इसके बाद अधिकारी ठसका अली गांव में पहुंचे।

Posted By: Jagran

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