जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : श्रीमद्भगवद्गीता ¨हदू धार्मिक ग्रंथों में सबसे श्रेष्ठ ग्रंथ माना गया है। यह ग्रंथ मात्र एक ग्रंथ नहीं है, बल्कि हजारों वर्षों पहले कहे गए ऐसे उपदेश हैं जो मनुष्य को आज भी जीने की कला सिखाते हैं। जीवन के विभिन्न रास्तों पर मार्गदर्शन करते है। यह विचार अंतरराष्ट्रीय श्रीमद्भगवद्गीता जयंती समारोह 2018 के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन में आयोजित अंतरविद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र पाल ¨सह ने बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं भारत माता, श्रीकृष्ण के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन से हुआ। एसपी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता जीवन निर्माण का ग्रंथ है। मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि आज आवश्यकता है कि श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षा भारत के सभी विद्यालयों एवं वि‌र्श्व विद्यालयों में अनिवार्य रूप से दी जाए। प्रतियोगिता के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह स्तर के मुख्यातिथि हरियाणा जेल विभाग के अतिरिक्त जेल महानिरीक्षक डॉ. हरिश रंगा ने कहा गीता में जीवन जीने की कला का सूत्र है। श्रीमद्भगवद्गीता एक सार्वदेशिक और सार्वभौमिक ग्रंथ है। समापन स्तर की अध्यक्षता कुवि के ¨हदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. पुष्पा रानी ने की। कार्यक्रम में प्रतियोगिता में अधिवक्ता विवेक गोयल, डॉ. बबलू वेदालंकार, चौधरी राम रत्?न कटारिया, एड्वोकेट सोमनाथ कक्कड़ उपस्थित रहे।

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