जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : वशिष्ठ कालोनी स्थित श्री लालद्वारा मंदिर में चल रही शिव महापुराण कथा में पंडित राजेंद्र पराशर ने शिव विवाह का प्रसंग सुनाया। मौके पर जिला परिषद के अध्यक्ष गुरदयाल सुनेहडी ने बतौर मुख्यातिथि दीप प्रज्वलित किया।

कथावाचक पराशर ने उन्हें आशीर्वाद स्वरूप शिवपुराण भेंट किया। कथा में शिव पार्वती बने कलाकारों की झांकी दिखाई गई। पराशर ने कहा कि राजा हिमालय की पुत्री उमा भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए पर्वतों पर 88 हजार वर्ष तक घोर तपस्या करती है, जिस कारण उसका एक नाम पार्वती पड़ गया। वर्षा, सर्दी, गर्मी और भूख-प्यास की परवाह किए बिना वह तपस्या में लीन रहती है। भगवान शिव पार्वती की तपस्या की परीक्षा तरह-तरह से लेते हैं और उसे कहते हैं कि वह उनसे विवाह करके परेशान रहेगी, लेकिन पार्वती अटल रहती है। अंत में शिव को पार्वती के निर्णय का सम्मान करना पड़ता है और वे विवाह के लिए राजी हो जाते हैं। शिव कथा की आरती में प्रधान केवल कृष्ण पाठक, कमल भारद्वाज, विजय अत्री, विश्वनाथ मिश्र, सोमनाथ कक्कड़, मदन कुमार धीमान, मुलखराज अनेजा, वेद आनंद, रमेश पाठक, अशोक भारद्वाज, देवशरण, एसके कपिला, मलूकचंद, रामस्वरूप रामा, गोपाल गौड, रामेश्वर सैनी व कश्मीर चंद वधवा उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

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