जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र :

चयनित पीजीटी संस्कृत ने नियुक्ति की मांग को लेकर सोमवार को थानेसर विधायक सुभाष सुधा को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने अपने ज्ञापन में संस्कृत अध्यापकों के खाली पड़े पदों पर भर्ती करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में एक भी संस्कृत अध्यापक और संस्कृत प्रवक्ता की नियुक्ति नहीं हुई है। शिक्षा विभाग में हजारों की संख्या में संस्कृत प्रवक्ताओं की रिक्तियां पड़ी हैं। पिछले पांच वर्षों में लाखों बच्चे संस्कृत पढ़ने से वंचित रह गए हैं। जिस स्कूल में संस्कृत अध्यापक ही नहीं होंगे, वहां संस्कृत पढ़ने के इच्छुक विद्यार्थियों को भी मजबूरन अन्य विषयों पढ़ने पड़ेंगे। सरकार की संस्कृत के प्रति इस अनदेखी के कारण ही लाखों गीता पढ़ने वाले बच्चे गीता को संस्कृत में न जानकर केवल हिदी में ही पढ़ सकेंगे। सरकार की अगर गीता के प्रति इतनी श्रद्धा है तो गीता की मूल भाषा को बचाने का प्रयास भी करना चाहिए। इस अनदेखी से कुछ वर्षों पश्चात तो ये गीता जयंती केवल एक मेला रूपी आयोजन बनकर ही रह जाएगी। अगर विद्यालयों में संस्कृत अध्यापक ही नहीं होगा तो संस्कृत पढ़ने वाले कैसे पैदा होंगे। गीता को बचाने के लिए संस्कृत बचानी जरूरी है और संस्कृत बचाने के लिए संस्कृत अध्ययन और अध्यापन बचाना जरूरी है। संस्कृत प्रवक्ताओं का फाइनल रिजल्ट आने के बावजूद सरकार इनकी नियुक्ति नहीं करा रही है। अब सरकार संस्कृत अध्यापक चयन का मामला अदालत में चले होने का बहाना बना रही है। हालांकि अदालत ने तीन बार संस्कृत प्रवक्ताओं को ज्वाइनिग देने का समय दिया है लेकिन सरकार की संस्कृत के प्रति बेरुखी के कारण नियुक्ति नहीं हो रही है। सरकार अगर चाहे तो आज भी चयन प्रक्रिया पूर्ण कर सकती है। उन्होंने कहा कि छह नंवबर को सटे हटकर, आज तक भर्ती पर कोई सटे नही हैं, लेकिन 25 दिन गुजरने बावजूद भी कोई नियुक्ति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार गीता का सही मायने में प्रचार-प्रसार चाहती है तो संस्कृत अध्यापकों को जल्द नियुक्ति दे।

Posted By: Jagran

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